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नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन पर कल फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

Mon, 16 Mar 2020 06:35 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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सुप्रीम कोर्ट मंगलवार सुबह 10.30 बजे नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के मामले में फैसला सुनाएगा।

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लोकसभा में सरकार ने कहा था- कोर्ट के आदेश का पालना होगा
बता दें कि बीती 11 मार्च को केंद्र सरकार ने लोकसभा में कहा था कि सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के लिए वह तैयार है। साथ ही सरकार ने कहा कि वह इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरा पालन करेगी। रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने टीएमसी सांसद सौगत रॉय के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी थी।

अपने जवाब में नाइक ने कहा था कि हम कोई भेदभाव नहीं करेंगे। शीर्ष कोर्ट के आदेशों का पूरी गंभीरता के साथ पालन किया जाएगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते माह अपने आदेश में कहा था कि सेना में महिलाओं को स्थायी तैनाती मिलनी चाहिए और पुरुष अधिकारियों की ही तरह उन्हें सैन्य कमान में भी तैनात किया जाना चाहिए।
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भारत में क्या है स्थिति

  • 1950 में बने आर्मी एक्ट में महिलाओं को सेना की स्थायी सेवा के लिए अयोग्य ठहराया गया था।
  • 42 साल बाद सरकार ने महिलाओं को पांच शाखाओं में अधिकारी बनाने की अधिसूचना जारी की।
  • 1992 जनवरी में महिलाओं के सेना में अधिकारी बनने का यह ऐतिहासिक पल आया।
  • 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के सेना में स्थायी कमीशन पाने का रास्ता साफ किया।
  • 03 महीने के अंदर सरकार को सभी सेवारत एसएससी महिला अधिकारियों को देना होगा स्थायी कमीशन।
  • 14 साल या 20 साल की सेवा पूरी हो जाने का स्थायी कमीशन देने पर नहीं होगा कोई प्रभाव।

स्थायी कमीशन से क्या बदलेगा

स्थायी कमीशन दिये जाने का मतलब यह है कि महिला सैन्य अधिकारी अब रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकती हैं। अगर वे चाहें तो पहले भी नौकरी से इस्तीफा दे सकती हैं। अब तक शार्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में नौकरी कर रही महिला अधिकारियों को अब स्थायी कमीशन चुनने का विकल्प दिया जाएगा। स्थायी कमीशन के बाद महिला अधिकारी पेंशन की भी हकदार हो जाएंगी।

इन विभागों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन
महिला अधिकारियों को न्यायाधीश एडवोकेट जनरल, सेना शिक्षा कोर, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स और इंटेलिजेंस कोर में स्थायी कमीशन दिया जाएगा।

पहले इन दो कोर में ही मिलता था महिलाओं को स्थायी कमीशन

सेना में कार्यरत महिला अधिकारियों को पहले सिर्फ न्यायाधीश एडवोकेट जनरल (JAG) और सेना शिक्षा कोर में ही स्थायी कमीशन दिया जाता था। इसके बाद इनकी संख्या में समय-समय पर बढ़ोतरी की गई। हालांकि महिलाओं को अब भी युद्ध क्षेत्र में तैनाती नहीं दी जाएगी।

क्या है शॉर्ट सर्विस कमीशन
भारतीय सैन्य सेवा में महिला अधिकारियों को शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से भर्ती की जाती है। जिसके बाद वे 14 साल तक सेना में नौकरी कर सकती है। इस अवधि के बाद उन्हें रिटायर कर दिया जाता है। हालांकि 20 साल तक नौकरी न कर पाने के कारण रिटायरमेंट के बाद इन्हें पेंशन भी नहीं दी जाती है।
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बदलते रहे शार्ट सर्विस कमीशन के नियम-कानून

सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के नियम कानून समय-समय पर बदलते रहे। पहले इसके तहत भर्ती महिलाएं केवल 10 साल तक ही नौकरी कर पाती थीं। बाद में सातवें वेतन आयोग में नौकरी की अवधि को बढ़ाकर 14 साल कर दिया गया। 

शार्ट सर्विस कमीशन से ये होता था नुकसान
महिला अधिकारियों को सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के द्वारा 14 साल की नौकरी करने के बाद सबसे बड़ी मुश्किल रोजगार मिलने की होती है। इनको पेंशन भी नहीं मिलती है जिससे इनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है। इसके अलावा भी कई ऐसी सुविधाएं हैं जो इन्हें नहीं मिलती है। 

शार्ट सर्विस कमीशन क्यों शुरू किया गया
शार्ट सर्विस कमीशन शुरू करने का मकसद अधिकारियों की कमी से जूझ रही सेना की मदद करना था। इसके तहत सेना में बीच के स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है।
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