राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लैंगिक न्याय के लक्ष्य पर आगे बढ़ने के लिए भारतीय न्यायपालिका के प्रयासों की रविवार को प्रशंसा की और कहा कि उच्चतम न्यायालय हमेशा से सक्रिय एवं प्रगतिशील रहा है। ‘न्यायपालिका और बदलती दुनिया’ विषयक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन 2020 में राष्ट्रपति ने कहा कि शीर्ष अदालत ने प्रगतिशील सामाजिक परिवर्तन की अगुवाई की है।
विधि विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों ने भारत के कानूनी एवं संवैधानिक ढांचे को मजबूती दी है। राष्ट्रपति ने भारत की भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न भाषाओं में फैसले उपलब्ध कराने के उच्चतम न्यायालय के प्रयासों को असाधारण बताया। उन्होंने नौ स्वदेशी भाषाओं में फैसले उपलब्ध कराने के लिए उच्चतम न्यायालय की प्रशंसा की।
उन्होंने दो दशक पुराने विशाखा दिशा-निर्देशों का संदर्भ दिया जो कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए लागू किया गया था। राष्ट्रपति ने कहा कि अगर एक उदाहरण दें तो लैंगिक न्याय के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्चतम न्यायालय हमेशा से सक्रिय और प्रगतिशील रहा है।
उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए दो दशक पहले दिशा-निर्देश जारी करने से लेकर सेना में महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के लिए इस महीने निर्देश जारी करने तक उच्चतम न्यायालय ने प्रगतिशील सामाजिक परिवर्तन की अगुवाई की है।
उन्होंने पर्यावरणीय संरक्षण एवं सतत विकास के समन्वय में न्यायपालिका की भूमिका का संदर्भ दिया जिस पर कई देशों में बहुत ध्यान दिया जाता है। सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के मद्देनजर न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों पर राष्ट्रपति ने कहा कि डाटा संरक्षण और निजता के अधिकार जैसे नए प्रश्न उठ गए हैं।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों ने भारत के कानूनी एवं संवैधानिक ढांचे को मजबूत किया है और इसकी पीठ एवं बार को अपने कानूनी विद्वता एवं बौद्धिक विवेक के लिए जाना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र लाने की तरफ उठाए गए हालिया कदमों से काफी हद तक अदालत का बोझ कम होने की संभावना है।