सरकारी नौकरियों केलिए आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक सहित अन्य अनियमितताओं से पार पाटने केलिए सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को तीन सदस्यीय कमेटी के गठन का निर्णय लिया है।
न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कमेटी केसदस्य केतौर पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईएडीआई) केपूर्व चेयरमैन नंदन नेलकणी और कंप्यूटर वैज्ञानिक विजय पी भाटकर केनाम का सुझाव भी दिया है। हालांकि पीठ ने कहा है कि वकील प्रशांत भूषण को और नाम सुझाने के लिए कहा है।
वास्तव में कर्मचारी चयन आयोग(एसएससी) परीक्षा, 2017 पेपर लीक मामले पर शान्तनु कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पेपर लीक आदि अनियमितताएं सिर्फ एसएससी परीक्षा तक सीमित है बल्कि अन्य परीक्षाओं में भी इस तरह की अनियमितताएं सामने आती रहती हैं।
भूषण ने पीठ को सझाव दिया कि बेहतर होगा कि विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई जाए जो इन अनियमितताओं से पार पाटने का उपाय निकाले। पीठ ने भूषण केसुझाव पर सहमति जताते हुए तीन सदस्यीय कमेटी के गठन का निर्णय लिया। हालांकि पीठ ने कहा कि इस समस्या को पूरी तरह तो खत्म होना तो असंभव कार्य है लेकिन इस तरह की घटनाओं को कम जरूर किया जा सकता है। पीठ ने भूषण को कमेटी केसदस्यों के लिए नाम सुझाने के लिए कहा है। अब अगले हफ्ते इस पर सुनवाई होगी।
पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्यों नहीं कर्मचारी चयन आयोग(एसएससी) परीक्षा, 2017 को रद्द कर दिया जाए और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी(एनटीए) या सीबीएसई केद्वारा परीक्षा फिर से आयोजित कराई जाए? इस पर केंद्र सरकार को अपनी राय बताने के लिए कहा गया था। मालूम हो कि इस परीक्षा केपरिणाम जारी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।
वृहस्पतिवार को सुनवाई केदौरान केंद्र सरकार की ओर पेश वकील ने कहा कि उनके सरकार का निर्देश लाने केएक हफ्ते का वक्त दिया जाए। जिस पर पीठ ने वकील को अगले हफ्ते निर्देश लाने के लिए कहा है।