सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग से पूछा कि उसने आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले नेताओं के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की है। आयोग ने कहा कि वह शक्तिहीन है और इसलिए नियम तोड़ने वालों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के आयोग के अधिकारों का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। पीठ ने मंगलवार को आयोग के एक अधिकारी को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
एनआरआई हरप्रीत मनसुखानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील अमित शर्मा से जानना चाहा कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा सुप्रीमो मायावती पर धर्म व जाति के आधार पर वोट मांगने या भड़काऊ भाषण के कथित आरोप पर क्या कार्रवाई की गई है।
पीठ ने कहा, ‘यह इस तरह की चीज है, जिस पर आपको तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। आपका रवैया टालमटोल का नहीं होना चाहिए।’
उम्मीदवारों को अयोग्य नहीं ठहरा सकते
चुनाव आयोग के वकील अमित शर्मा ने कहा, ‘हम किसी दल की मान्यता समाप्त नहीं कर सकते और न ही उम्मीदवारों को अयोग्य ठहरा सकते हैं। हम नोटिस जारी करते हैं। फिर से उल्लंघन करने वालों को एडवाइजरी जारी करते हैं। अंत में हम उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करते हैं।’
आयोग के पास शक्तियों की कमी नहीं
याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगडे़ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-324 के तहत चुनाव आयोग के पास अधिकारों का भंडार है। पीठ ने आयोग से जानना चाहा कि 31 मार्च को योगी आदित्यनाथ के ‘मोदीजी की सेना’ वाले बयान पर क्या कार्रवाई हुई। आयोग के वकील ने कहा कि योगी का जवाब आने के बाद मामला बंद कर दिया।