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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- बैन हो ट्रिपल तलाक तो केन्द्र कानून लाने को तैयार

Mon, 15 May 2017 03:40 PM IST
amarujala.com- Presented by: जया पाण्डेय
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tripel talak
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ट्रिपल तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी द्वारा बहुविवाह, निकाह और हलाला को लेकर दी गई याचिका पर संज्ञान लेते हुए कहा कि अभी इस पर सुनवाई नहीं कर सकते। इस पर भविष्य में सुनवाई करेंगे। समय की बाध्यता की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को सीमित रखा है।
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रोहतगी ने पांच जजों की बेंच के सामने कहा कि अगर ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह से रोक लगा देगा तो हम इस पर कानून बनाएंगे। इस कानून के जरिए मुस्लिम समुदाय में शादी और तलाक को नियोजित किया जाएगा।

रोहतगी ने संवैधानिक बेंच को ये भी बताया कि ट्रिपल तलाक समुदाय के अंदर ही नहीं बल्कि देश के भीतर भी महिलाओं के समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। SC में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहातगी ने मामले पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देश इन मामलों पर आगे बढ़ गए हैं। हम सेक्युलर देश है फिर भी ये बहस अभी तक जारी है।
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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा था। केंद्र सरकार हमेशा से ट्रिपल तलाक के विरोध में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समुदाय से इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होने देने की अपील की थी।

गौरतलब है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिन तक सुनवाई करना तय किया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे से जुड़े हर पहलू पर विचार करेगा। कोर्ट ने ये तय किया है इन 6 दिनों की सुनवाई में 2 दिन मामले पर विपक्षी बोलेंगे जबकि 2 दिन समर्थक अपना पक्ष रखेंगे। 

बता दें कि गुरूवार से ही इस मामले में पांच जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू कर दी है। इस पीठ में मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं। इस पीठ की सबसे बड़ी शासियत ये है कि इसमें  हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी हर धर्म को मानने वाले जज शामिल हैं।

अब तक की सुनवाई में तीन तलाक व्यवस्था को खत्म करने की पैरवी की गई है। शुक्रवार को न्यायमित्र सलमान खुर्शीद ने कहा था कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस पर कदम उठाए कि ट्रिपल तलाक घिनौना कृत्य है लेकिन ये अब तक वैध्य है।

इसके बाद ऑल फोरम फॉर अवेयरनेस ऑन नेशनल सिक्युरिटी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने ट्रिपल तलाक पर पक्ष रखा था। उनके बाद मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से आरिफ मोहम्मद खान ने कोर्ट में इस मुद्दे पर दलीलें दी थीं। 
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