कोरोना वैक्सीन लगातीं स्वास्थ्यकर्मी
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सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को कोविड टीकाकरण में न्यायाधीश, वकील और न्यायालय से जुड़े कर्मचारियों को भी प्राथमिकता दिए जाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। याचिका में कहा गया था कि न्यायपालिका से जुड़े लोग भी दूसरे फ्रंट लाइन वारियर की तरह आवश्यक सेवा देने में लगे हैं। इस याचिका पर विचार करते हुए कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा।
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एसएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम की पीठ ने वकील अरविंद सिंह द्वारा दायर याचिका को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
याचिका में कहा गया था कि केंद्र ने न्यायपालिका, न्यायिक कर्मचारियों, वकीलों और उनके कर्मचारियों के सदस्यों के कोविड-19 टीकाकरण में प्राथमिकता वाली श्रेणी में शामिल करने के उनके अनुरोध पर विचार नहीं किया है।
वकील ऋषि सहगल की जरिए दायर कराई गई याचिका में कहा गया, ‘याचिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायाधीश, वकील, अदालत के कर्मचारी और वकीलों के कर्मचारी, जो न्यायिक प्रशासन के रूप में आवश्यक सेवाओं से एक हैं, उन्हें कोविड-19 टीकाकरण में प्राथमिकता वाली श्रेणी में शामिल किया जाए।
उसने कहा, ‘टीकाकरण के लिए उनके साथ अन्य आवश्यक सेवाओं के कर्मचारियों की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए।’
जनहित याचिका में कहा गया है कि केंद्र ने समूह की पहचान की है, जिन्हें पहले टीका लगाया जाएगा, लेकिन यह किसी भी निर्धारित मानदंड पर आधारित नहीं है और यह स्पष्ट रूप से मनमानी तथा बिना सोचे-समझे तैयार की गई है।