फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोई भी परंपरा संविधान से ऊपर नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Mon, 11 Apr 2016 08:49 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान से ऊपर कोई परम्परा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में रजोधर्म आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि लिंग के आधार पर भेदभाव की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती।  न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह सवाल उठाया कि क्या कोई परंपरा संविधान से ऊपर हो सकती है। पीठ ने कहा कि मंदिर केट्रस्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिरकार संविधानिक तौर पर मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को कैसे स्वीकार किया जा सकता है?
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि लिंग केआधार पर इस तरह का भेदभाव से लैंगिक न्याय केलिए खतरा है। पीठ ने कहा कि क्यों नहीं रजोधर्म आयुवर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश दी जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि क्या माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए महिलाओं केअधिकार पर रोक लगाई जा सकती है। किसी तरह की पाबंदी सभी के लिए समान होनी चाहिए। 
पीठ ने कहा कि आस्था केआधार पर मंदिर का निर्माण किया जाता है और मंदिर जैसे सार्वजनिक स्थल में अगर कोई जाना चाहता है तो उसे कैसे रोका जा सकता है।

अगर कोई महिला मंदिर में जाना चाहती है तो उसे प्रवेश देने से कैसे इनकार किया जा सकता है। पीठ ने सवाल किया कि अगर किसी जगह मां, पिता, कुलगुरु या कुल पुरोहित है तो सबसे पहले किसे प्रणाम किया जाना चाहिए। पीठ ने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा कि पहले मां, फिर पिता और इसकेबाद कुलगुरु या कुल पुरोहित का स्थान होता है। मां का स्थान सबसे पहला है।
विज्ञापन


सुनवाई केदौरान पीठ ने वेद और उपनिषद का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान महिलाओं और पुरुषों के साथ भेदभाव नहीं तो मंदिर में ऐसा भेदभाव क्यों। पीठ ने यह भी कहा कि मंदिरों में भगवान की मूर्तियां होती है। लोग वहां पूजा करने केलिए आते हैं। लेकिन सिर्फ इसलिए कि वह महिला है, उसे प्रवेश की इजाजत क्यों नहीं मिलनी चाहिए। पीठ ने साफ कहा कि इस मामले में कोई भी निर्णय संविधान केआधार पर लिया जाएगा।

अदालत यंग लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया कि सबरीमाला मंदिर में उन लड़कियों के प्रवेश पर पाबंदी है जिनका मासिक धर्म शुरू हो चुका है। हालांकि उन महिलाओं की मंदिर में प्रवेश की इजाजत है जो रजोनिवृति हो। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें