दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में फंसे दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। मामले की सुनवाई कर रही शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा, सीबीआई और ईडी का आरोप है कि शराब समूह से 100 करोड़ रुपये प्राप्त हुए और इसका इस्तेमाल सिसोदिया के सहयोगियों और आप के अन्य नेताओं ने किया। यह कुछ हद तक बहस का विषय है।
साथ ही आरोप यह था कि 100 करोड़ रुपये की रिश्वत में से 45 करोड़ रुपये गोवा चुनाव के लिए हवाला के जरिये आम आदमी पार्टी को हस्तांतरित किए गए थे। हालंकि, सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि आप पर मुकदमा नहीं चलाया जा रहा है। लिहाजा कोर्ट ने कहा कि यह आरोप नहीं लगाया जा सकता है कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम 2002 की धारा 70 के तहत सिसोदिया परोक्ष रूप से उत्तरदायी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि गोवा चुनाव के लिए आप को 45 करोड़ रुपए के ट्रांसफर में सिसोदिया की संलिप्तता के संबंध में कोई विशेष आरोप नहीं है।
सब पर समान रूप से लागू होता है कानून
पीठ ने कहा, कानून के शासन का अर्थ है कि कानून सरकार समेत सभी नागरिकों और संस्थानों पर समान रूप से लागू होते हैं। कानून के शासन के लिए हाशिये पर पड़े लोगों के लिए न्याय तक पहुंच के समान अधिकार की आवश्यकता है। सिसोदिया की अर्जी खारिज करते हुए पीठ ने कई पहलुओं पर गौर किया। पीठ ने कहा, सीबीआई ने बताया है कि साजिश और उसमें सिसोदिया की संलिप्तता पूरी तरह स्थापित होती है। पीठ ने कहा, स्पष्टता के लिए, बिना कोई जोड़, घटाव या विस्तृत विश्लेषण किए, हम अपीलकर्ता के खिलाफ सीबीआई के आरोप पत्र में कही गई बातों को दोहराते हैं।
इन मामलों को मौत की सजा उम्रकैद जैसे अपराधों से जोड़ना उचित नहीं
कानूनी सवालों के जवाब नहीं मिले
पीठ ने कहा, दलीलों के दौरान कुछ कानूनी सवाल उठे, लेकिन जवाब नहीं मिला। जस्टिस खन्ना ने कहा, इन सवालों का अगर उत्तर आया भी तो वह बहुत ही सीमित था। पीठ ने सिसोदिया के इस तर्क पर भी गौर किया कि सीबीआई के 294 और डीओई के 162 गवाहों व दोनों की ओर से क्रमश: 31,000 और 25,000 पन्नों के दस्तावेजों के बाद भी आरोपों पर बहस शुरू नहीं हुई है।
सिसोदिया को 2.20 करोड़ रिश्वत देने का दावा आरोप नहीं है
पीठ ने बिचौलिये दिनेश अरोड़ा की ओर से सिसोदिया को 2.20 करोड़ रुपये की रिश्वत देने वाले दावे पर कहा कि यह कोई आरोप नहीं है। सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में भी इसका जिक्र नहीं किया है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस भुगतान को आपराधिक आय साबित करना मुश्किल हो सकता है।
अंतरिम जमानत अर्जियों पर भी मेरिट के आधार पर हो फैसला
पीठ ने कहा, मनीष सिसोदिया खराब सेहत और पत्नी की बीमारी से जुड़ी चिकित्सीय आपात स्थिति के आधार पर अंतरिम जमानत की अपील भी कर सकते हैं। उनकी इन अपीलों पर मेरिट के आधार पर ही फैसला होना चाहिए। पीठ ने कहा, अगर मुकदमा पूरा होने में देरी पर सिसोदिया जमानत अर्जी दाखिल करते हैं तो उस पर सुनवाई के दौरान निचली अदालतों को वर्तमान और पहले खारिज की जा चुकी अर्जियों पर गौर किए बगैर मेरिट के आधार पर फैसला करना होगा। तब त्वरित सुनवाई के अधिकार पर की गई टिप्पणियों पर विचार करना होगा। मुकदमा लंबित रहने से किसी को लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। पीठ ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के मामले में 2020 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी जिक्र किया। पीठ ने कहा, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तब 49 दिन जेल में काटे थे। हम सिसोदिया की ‘लंबी’ कैद को लेकर चिंतित हैं।
26 फरवरी से जेल में हैं सिसोदिया
सिसोदिया को सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था। एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू की और 9 मार्च को पूछताछ के बाद सिसोदिया को गिरफ्तार किया था।