सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव के कार्यों या निष्क्रियता को निर्वाचित सरकार के ठहराव की स्थिति में लाने का कारण नहीं बनना चाहिए। कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव को केंद्र की ओर से सेवा विस्तार देने को कानूनन सही ठहराने वाले अपने फैसले में यह टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने 29 नवंबर के फैसले में नरेश कुमार को छह महीने का सेवा विस्तार देने को हरी झंडी दी थी। यह फैसला बाद में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। नरेश कुमार 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने 28 पेज के फैसले में कहा, इस अदालत ने 2023 के संविधान पीठ के फैसले में कहा था कि सरकारी सेवकों को राजनीतिक रूप से तटस्थ होना जरूरी है। उसे सामूहिक जिम्मेदारी की त्रिस्तरीय-शृंखला में अंतर्निहित सिद्धांत को प्रभावी बनाने के लिए निर्वाचित सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहिए। इस हिसाब से मुख्य सचिव का पद विशिष्ट है। मुख्य सचिव के कार्यों या निष्क्रियता से निर्वाचित सरकार को गतिरोध में नहीं डालना चाहिए।