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Supreme Court: 'पीड़ित और कानूनी वारिस भी आरोपी के बरी होने पर कर सकते हैं अपील', सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

Mon, 25 Aug 2025 01:24 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपराध पीड़ित और उनके कानूनी वारिस आरोपी की बरी, हल्की सजा या अपर्याप्त मुआवजे के खिलाफ अपील कर सकते हैं। अदालत ने साफ किया कि पीड़ित का अधिकार आरोपी के बराबर है। धारा 372 सीआरपीसी में प्रावधान जोड़कर पीड़ितों को यह हक दिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अपराध के शिकार पीड़ित और उनके कानूनी वारिस आरोपी की बरी के खिलाफ अपील दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि अपराध पीड़ित का अधिकार उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि दोषी करार दिए गए आरोपी का। यह फैसला न्याय और संतुलन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
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जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि किसी अपराध के पीड़ित को भी यह अधिकार है कि वह निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील कर सके। अदालत ने कहा कि यह अधिकार केवल दोषी करार व्यक्ति या राज्य को ही नहीं, बल्कि पीड़ित और उसके वारिसों को भी मिलना चाहिए।

धारा 372 के तहत अपील का अधिकार
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 372 में 2009 में एक प्रावधान जोड़ा गया था, जिसके तहत पीड़ित पक्ष को भी अपील का अधिकार दिया गया। यह अधिकार इस बात से स्वतंत्र है कि पीड़ित शिकायतकर्ता है या नहीं। अदालत ने कहा कि जैसे आरोपी को धारा 374 के तहत अपील करने का अधिकार है, वैसे ही पीड़ित को भी अपील का अधिकार होना चाहिए।
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मृत्यु की स्थिति में वारिस करेंगे अपील जारी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अपील के दौरान पीड़ित की मृत्यु हो जाती है, तो उसके कानूनी वारिस उस अपील को आगे बढ़ा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह व्यवस्था न्याय सुनिश्चित करने और अपराध के पीड़ितों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए बेहद जरूरी है।
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न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
इस फैसले के बाद अब पीड़ित या उनके वारिस न केवल आरोपी की बरी के खिलाफ, बल्कि हल्की सजा या अपर्याप्त मुआवजे के खिलाफ भी अपील कर सकेंगे। अदालत ने कहा कि पीड़ित का अधिकार सीमित नहीं किया जा सकता। इस ऐतिहासिक फैसले को न्याय व्यवस्था में संतुलन और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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