सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता देबेंद्र नाथ रॉय की कथित आत्महत्या से जुड़े मामले की जांच सीबीआई से कराने की याचिका पर सुनवाई बंद कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट पहले ही इस मामले पर सुनवाई कर फैसला सुना चुका है और इस पर आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि रॉय की पत्नी की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस मामले को पहले ही समग्रता में देख लिया है। साथ ही कहा कि इस मामले की जांच में देरी नहीं हुई है। जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी ने पाया कि याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा और एक पत्रकार ने सीबीआई या एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसी से इस मामले की जांच कराने की मांग की थी।
साथ ही इस मामले को पश्चिम बंगाल से दिल्ली स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था। अपनी याचिका में रॉय की पत्नी चंद्रिमा रॉय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह भी कहा था कि पुलिस अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी जाए। राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में रॉय की मौत को राजनीतिक हत्या बताने के आरोप को खारिज कर दिया।