सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट नवीनीकरण के समय भविष्य की यात्रा या वीजा का ब्योरा मांगना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि नागरिकों की आजादी संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा अधिकार है। अदालत ने चेतावनी दी कि सुरक्षा के नाम पर लगाई गई अस्थायी रोक अगर स्थायी बन गई, तो इससे व्यक्ति की गरिमा और संविधान की भावना को ठेस पहुंचेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि आजादी सरकार की मेहरबानी नहीं, बल्कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने साफ किया कि पासपोर्ट रिन्यूअल के समय व्यक्ति से भविष्य की यात्रा या वीजा का ब्योरा मांगना जरूरी नहीं। यह फैसला एक आरोपी की याचिका पर सुनाया गया, जिस पर मामला लंबित है।
इस आधार पर पासपोर्ट देने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने आगे बताया कि पासपोर्ट एक्ट की धारा 6(2)(f) के बावजूद 1993 की एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार, जिन लोगों पर केस चल रहा है, उन्हें भी पासपोर्ट मिल सकता है, बशर्ते कोर्ट इसकी अनुमति दे और व्यक्ति यह वादा करे कि वह जब भी बुलाया जाए, कोर्ट में हाजिर होगा।
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इस दौरान अदालत ने साफ किया कि कानून यह नहीं कहता कि हर बार पासपोर्ट जारी करने से पहले कोर्ट को विदेश जाने की पूरी योजना मंज़ूर करनी ही होगी। कोर्ट चाहे तो पासपोर्ट रिन्यू करने दे और हर विदेश यात्रा के लिए अलग से अनुमति लेने की शर्त लगा सकता है।