भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी. आर. गवई शुक्रवार 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के दो नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाएंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराध्ये और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपुल मनुभाई पंचोली को 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था। इनकी नियुक्ति के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की पूरी कार्यरत संख्या 34 हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से रिक्त पदों को लेकर चिंता जताई जाती रही थी। अब अराध्ये और पंचोली के शामिल होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में 34 जजों की पूरी कार्यरत संख्या पूरी हो जाएगी। खास बात यह है कि जस्टिस पंचोली अक्टूबर 2031 में जस्टिस जॉयमल्या बागची के सेवानिवृत्त होने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे। वह 3 अक्टूबर 2031 को पदभार संभालेंगे और 27 मई 2033 को सेवानिवृत्त होंगे।
कॉलेजियम की सिफारिश और विवाद
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दोनों नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। हालांकि, कॉलेजियम की सदस्य और सुप्रीम कोर्ट की इकलौती महिला न्यायाधीश जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने जस्टिस पंचोली की पदोन्नति पर असहमति जताई। उन्होंने इसे न्यायपालिका के लिए प्रतिकूल बताया और चेतावनी दी कि यह निर्णय कॉलेजियम की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है।
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जस्टिस आलोक अराध्ये का सफर
13 अप्रैल 1964 को जन्मे जस्टिस आलोक अराध्ये ने 1988 में वकालत शुरू की। 2009 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2011 में स्थायी न्यायाधीश बने। बाद में वे जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और तेलंगाना हाईकोर्ट में विभिन्न भूमिकाओं में कार्यरत रहे। जुलाई 2023 में उन्हें तेलंगाना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया और जनवरी 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट का कार्यभार सौंपा गया।
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जस्टिस विपुल पंचोली का करियर
28 मई 1968 को अहमदाबाद में जन्मे जस्टिस पंचोली ने 1991 में वकालत शुरू की। वे सात वर्षों तक गुजरात हाईकोर्ट में असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रहे। 2014 में उन्हें गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया और 2016 में स्थायी नियुक्ति मिली। 2023 में वे पटना हाईकोर्ट पहुंचे और 2025 में वहां के मुख्य न्यायाधीश बने। इसके अलावा वे 21 साल तक अहमदाबाद के एल. ए. शाह लॉ कॉलेज में विजिटिंग फैकल्टी भी रहे।