सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल डर कि जमानत मिलने पर महिला फिर अपराध करेगी, रोकने का पर्याप्त कारण नहीं। आदेश में सार्वजनिक व्यवस्था पर असर स्पष्ट नहीं था। कोर्ट ने महिला की रिहाई का आदेश दिया और हाईकोर्ट का अक्टूबर 2025 का आदेश रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना की एक महिला के प्रिवेंटिव डिटेंशन (रोकने के आदेश) आदेश को रद्द कर दिया है। महिला को 1986 के तेलंगाना कानून में खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम के तहत ड्रग अपराध में आरोपी बताया गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल यह डर कि जमानत मिलने पर वह फिर से अपराध करेगी, किसी को रोकने का पर्याप्त कारण नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी कहा कि डिटेंशन आदेश में यह स्पष्ट नहीं था कि महिला के अपराध से सार्वजनिक व्यवस्था पर कैसे असर पड़ेगा और जमानत की शर्तों या पिछले मुकदमों पर ध्यान नहीं दिया गया।
बता दें कि महिला को मार्च 2025 में रोका गया था क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर का मानना था कि उसके खिलाफ चल रहे मामूली मुकदमे उसका व्यवहार नहीं बदल पाएंगे और जमानत मिलने पर वह फिर से अपराध करेगी। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि जमानत की शर्तें और पिछले मामलों की जानकारी पर विचार नहीं किया गया और महिला को रोकने के लिए कोई ठोस आधार नहीं था।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेके महेश्वरी और एएस चंद्रुकर की बेंच ने कहा कि केवल आशंका या अनुमान कि कोई व्यक्ति भविष्य में अपराध करेगा, उसे रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि डिटेंशन ऑर्डर में यह स्पष्ट नहीं था कि महिला के अपराध से जनता की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था पर कैसे असर पड़ेगा।
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ तीन मामूले दर्ज होने से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होती, जब तक यह साबित न हो कि नशे का सामान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ऐसे में अगर महिला ने जमानत की शर्तें तोड़ी होतीं, तो उसकी जमानत रद्द करने का कानूनी रास्ता था, उसे रोकने के लिए ऐसा नहीं किया गया।
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इस दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था में अंतर है और डिटेंशन आदेश में इसे ध्यान में नहीं रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने महिला की तत्काल रिहाई का आदेश दिया, तेलंगाना हाईकोर्ट के 28 अक्टूबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि भविष्य में केवल अनुमान या आशंका पर किसी को रोकना उचित नहीं होगा।
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