सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें नजफगढ़ झील के कायाकल्प का मुद्दा दिल्ली के उपराज्यपाल की अध्यक्षता वाली एक समिति को सौंपा गया था।
नजफगढ़ झील के कायाकल्प मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को रद्द कर दिया है। एनजीटी ने मुद्दा दिल्ली के उपराज्यपाल की अध्यक्षता वाली एक समिति के पास सौंपा था। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति संजय करोल ने कहा कि एनजीटी ने 16 फरवरी को जारी अपने आदेश में आईएनटीएसीएच द्वारा दायर याचिका पर गौर किए बिना कह दिया कि अधिकरण संबंधित मुद्दे का निपटारा किसी अन्य मामले में करेगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर खारिज किया एनजीटी का आदेश
शीर्ष अदालत ने प्रक्रियात्मक आधार पर एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि INTACH की याचिका पर न्यायाधिकरण द्वारा नजफगढ़ झील कायाकल्प के मुद्दे से संबंधित अन्य सभी याचिकाओं के साथ सुनवाई की जानी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को खारिज कर कहा कि अधिकरण को इन याचिका की सुनवाई नजफगढ़ झील के पुनरूद्धार से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ करना चाहिए।
कोर्ट ने पारित किया लिखित आदेश
शीर्ष अदालत ने प्रक्रियात्मक आधार पर एनजीटी के आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि अधिकरण को आईएनटीएसीएच की याचिका की सुनवाई नजफगढ़ झील के पुनरुद्धार से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ करनी चाहिए थी। पीठ ने कहा कि हमें लगता है कि याचिका का निपटारा करना गलत है। इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने लिखित आदेश पारित कर कहा कि आदेश के पैराग्राफ 11 जिसमें निष्पादन संबंधित अन्य लंबित याचिका का निपटारा किया गया, उसे निरस्त किया जाता है।
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आईएनटीएसीएच की यह है मांग
सुप्रीम कोर्ट ने आईएनटीएसीएच की याचिका पर छह जुलाई को दिल्ली सरकार से जवाब मांगा, इसके बाद 31 जुलाई को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। आईएनटीएसीएच की मांग है कि नजफगढ़ झील को दिल्ली और हरियाणा सरकार द्वारा आर्द्रभूमि या जल निकाय घोषित किया जाए। आईएनटीएसीएच का कहना है कि झील के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण हो रहा है। लगातार निर्माण किए जा रहे हैं। इसलिए इससे गंभीर खतरा है।