फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'जहां जमानत नहीं देनी चाहिए, वहां दे रहे हैं': HC पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, दहेज हत्या के आरोपी की जमानत की रद्द

Thu, 30 Apr 2026 05:14 PM IST
नवीन पारमुवाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। कोर्ट ने आरोपी पति की जमानत रद्द करते हुए उसे सरेंडर करने का आदेश दिया और हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा आरोपी को जमानत दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। अदालत ने आरोपी पति की जमानत तुरंत रद्द करते हुए उसे एक हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि इस मामले का ट्रायल एक साल के भीतर पूरा किया जाए।
विज्ञापन


जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मृतका के पिता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी जिसमें मृतका की गर्दन के पास चोट के निशान पाए गए थे। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से पूछा कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में जमानत कैसे दी गई।

हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर क्यों उठे सवाल?
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने हाई कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शादी के सात साल के भीतर हुई मौत और गंभीर आरोपों के बावजूद जमानत देना समझ से परे है। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, 'हमें समझ नहीं आता कि हाई कोर्ट को क्या हो गया है। जिन मामलों में जमानत नहीं दी जानी चाहिए, वहां जमानत दी जा रही है।'
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: मनमाने हवाई किराये पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: सरकार से कहा- तीन बार समय दिया, फिर हलफनामा क्यों नहीं आया?

कोर्ट ने आरोपी के वकील से पूछा कि जब पत्नी की संदिग्ध हालत में घर के भीतर मौत हुई और शरीर पर बाहरी चोटें थीं, तो इसकी क्या सफाई है। जब वकील ने दलील दी कि आरोपी 18 महीने से जेल में है, तो कोर्ट ने साफ किया कि यह हत्या का मामला है और महिला का गला घोंटा गया था।
विज्ञापन


2019 में शादी, 2024 में हुई हत्या 
कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि शादी फरवरी 2019 में हुई थी और पत्नी की संदिग्ध मौत जुलाई 2024 में हुई। कानून के मुताबिक शादी के सात साल के भीतर अगर महिला की रहस्यमय तरीके से मौत होती है, तो उसे दहेज हत्या की श्रेणी में रखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हाई कोर्ट को जमानत देते समय इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 113बी के तहत अनुमान को ध्यान में रखना चाहिए था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान साफ तौर पर दर्ज थे।' अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ट्रायल चल रहा है और केवल एक गवाह का बयान हुआ है, इसलिए वह मामले की मेरिट पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करेगी। हालांकि कोर्ट ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में जमानत का आदेश कानूनन सही नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें