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Supreme Court: 'सीएनजी बिक्री पर मिले कमीशन पर BPCL-HPCL को देना होगा सर्विस टैक्स', सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Tue, 21 Jul 2026 10:53 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि बीपीसीएल और एचपीसीएल को अपने पेट्रोल पंपों पर महानगर गैस लिमिटेड की सीएनजी बेचने के बदले मिले कमीशन पर सर्विस टैक्स देना होगा। अदालत ने कहा कि दोनों कंपनियां सीएनजी की स्वतंत्र विक्रेता नहीं थीं, बल्कि एमजीएल की ओर से बिक्री को सुगम बनाने वाली एजेंट के रूप में काम कर रही थीं। इसलिए उनकी सेवाएं बिजनेस ऑक्सिलियरी सर्विस के दायरे में आती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को अपने पेट्रोल पंपों पर महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) की सीएनजी बेचने के बदले मिले कमीशन पर सर्विस टैक्स देना होगा।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों तेल कंपनियां एमजीएल के लिए बिजनेस ऑक्सिलियरी सर्विस प्रदान कर रही थीं, इसलिए वे सेवा कर से छूट का दावा नहीं कर सकतीं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस फैसले के साथ करीब 16.69 करोड़ रुपये के सर्विस टैक्स की मांग को फिर से बहाल कर दिया। इसमें बीपीसीएल पर 8.61 करोड़ रुपये और एचपीसीएल पर 8.08 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी शामिल है। इसके अलावा ब्याज और जुर्माना भी देना होगा।

सिर्फ एजेंट थे बीपीसीएल-एचपीसीएल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों कंपनियां सीएनजी खरीदकर अपने नाम से नहीं बेच रही थीं, बल्कि एमजीएल की एजेंट के रूप में काम कर रही थीं। एमजीएल ही गैस की मालिक थी, वही खुदरा कीमत तय करती थी, वही कीमत में बदलाव करती थी और पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर उसका नियंत्रण था। ऐसे में बीपीसीएल और एचपीसीएल केवल बिक्री को सुगम बनाने का काम कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि दोनों कंपनियों की भूमिका केवल एक फैसिलिटेटर की थी, जो एमजीएल की ओर से सीएनजी की बिक्री कराने के लिए विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही थीं।
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पेट्रोल पंप, कर्मचारी और सुविधाएं कंपनियों ने दीं
मामला उन समझौतों से जुड़ा था जिनके तहत मुंबई, ठाणे और आसपास के क्षेत्रों में बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों पर एमजीएल की सीएनजी बेची जाती थी। सीएनजी बेचने के लिए आवश्यक कंप्रेसर, स्टोरेज टैंक, डिस्पेंसर, पाइपलाइन और अन्य उपकरण एमजीएल ने लगाए थे। वहीं बीपीसीएल और एचपीसीएल ने पेट्रोल पंप की जगह, बिजली, पानी, बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध कराए थे।

ट्रिब्यूनल का फैसला पलटा
इस मामले में कस्टम, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलीय न्यायाधिकरण ने जून 2014 में बीपीसीएल और एचपीसीएल के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि यह लेनदेन प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल आधार पर बिक्री का है, इसलिए सर्विस टैक्स लागू नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अब उस फैसले को पलटते हुए कर विभाग की मूल मांग को सही ठहराया और सर्विस टैक्स की पूरी देनदारी बहाल कर दी।
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