मध्य प्रदेश के भोजशाला मन्दिर-मस्जिद विवाद से संबंधित याचिका पर अहम आदेश पारित किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने कहा, उपासना स्थल संबंधित मामलों की सुनवाई सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ही कर रही है।
मध्य प्रदेश स्थित भोजशाला मंदिर-सह-कमल मौला मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की पीठ में होगी। एक अहम घटनाक्रम में शीर्ष अदालत की दो जजों की खंडपीठ ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिए। इसके मुताबिक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने परिसर में सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया। हालांकि, अब इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, इसे प्रधान न्यायाधीश न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष रखा जाएगा।
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उपासना स्थल कानून को चुनौती
जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ऐसे कई मामलों की सुनवाई कर रही है, जिनमें उपासना स्थल कानून, 1991 को चुनौती दी गई है। हालांकि, वकील विष्णु शंकर जैन सहित प्रतिवादियों के वकीलों ने दावा किया कि उपासना स्थल अधिनियम के मामले में दिया गया आदेश इस मामले के आड़े नहीं आता, क्योंकि भोजशाला परिसर एएसआई की ओर से संरक्षित स्थल है। हालांकि, पीठ इससे सहमत नहीं हुई और उसने मुख्य न्यायाधीश से इस मामले को संबंधित मामलों के साथ जोड़ने के लिए उचित आदेश मांगा।
अदालत का स्पष्ट फरमान- कोई उत्खनन नहीं किया जाएगा
सुनवाई के दौरान भोजशाला परिसर स्थल पर उत्खनन के खिलाफ न्यायालय के पहले के अंतरिम आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिका के संदर्भ में जस्टिस रॉय ने कहा, यदि आप (प्रतिवादी) इस बात पर दबाव डालना चाहते हैं तो हम अवमानना मामले को उठाते हैं। हमने कुछ तस्वीरें देखी हैं। अंतरिम आदेश में हमने कहा था कि कोई उत्खनन नहीं किया जाएगा। हम तस्वीरों से पाते हैं कि कुछ उत्खनन चल रहा है। क्या आप प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं की ओर से नोटिस स्वीकार कर रहे हैं। जब अधिवक्ता जैन ने ऐसा नहीं करने का आग्रह किया तो पीठ ने मामले को सीजेआई संजीव खन्ना के समक्ष रखने का निर्देश देने वाला आदेश पारित किया