सुप्रीम कोर्ट ने 1993 दिल्ली बम ब्लास्ट के दोषी देविंदर पाल भुल्लर की रिहाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही न्यायाधीश आरएफ नरीमन एवं न्यायाधीश एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने यूथ कांग्रेस के पूर्व नेता मनिंदर सिंह बिट्टा की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। बिट्टा ने भुल्लर की रिहाई के फैसले को अवैध व असंवैधानिक बताते हुए इसे चुनौती दी थी। इस पर पीठ ने सरकार से जवाब मांगा है।
याचिका में कहा गया है कि 1993 के दिल्ली बम धमाकों के मामले में भुल्लर को फांसी की सजा हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। जिसका सीधा सा मतलब है कि वह सारी उम्र जेल में रहेगा और केंद्र सरकार इस फैसले को कम नहीं कर सकती।
मालूम हो कि साल 2001 में टाडा कोर्ट ने भुल्लर को मौत की सजा सुनाई थी, सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने जहां पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था वहीं राष्ट्रपति ने भी दया याचिका रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उसके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए साल 2014 में उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।