सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार को कोविड-19 के संक्त्रस्मण से बचने के लिए डिसइंफेक्टेड टनल में लोगों पर होने वाले रसायनिक छिड़काव पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है। इसके हानिकारक प्रभाव के मद्देनजर शीर्ष अदालत ने यह निर्णय लिया है।
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने कहा है कि विभिन्न अध्ययन ये बताते हैं कि इस तरह के रसायनिक छिड़काव और पराबैंगनी किरणों का मनुष्य के शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। पीठ ने कहा कि चूंकि यह लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है, इसलिए तत्काल उपाय करने की जरूरत है। पीठ ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि उसकी ओर से इसके इस्तेमाल को लेकर दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है।
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को एक महीने के भीतर इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी करने के लिए कहा है। पीठ ने सरकार से कहा है कि वह निर्देश जारी करने के लिए आखिरी दिन का इंतजार न करे। शीर्ष अदालत ने यह आदेश विधि छात्र गुरसिमरन सिंह नरुला द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में डिसइंफेक्टेड सुरंगों पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगाई गई थी।
गत सितंबर में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर कीटाणुशोधन सुरंगों को लगाने और इस्तेमाल को लेकर कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया है। सरकार ने कहा था कि मनुष्यों पर रासायनिक छिड़काव मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। सरकार ने उस वक्त कहा था कि इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी किया जा सकता है।