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Supreme Court: बॉम्बे HC की बेंच के पूर्व कर्मियों की पेंशन के लिए नियम बनाएं; कोर्ट का गोवा सरकार को निर्देश

Mon, 01 May 2023 08:58 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला की पीठ को गोवा सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने बताया कि ऐसे 21 कर्मचारियों में से 19 को अंतरिम पेंशन लाभ का भुगतान किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम समझौता करने के लिए हमें नियम बनाने की जरूरत है, जो किया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार से बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ के पूर्व कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने के लिए नियम बनाने को कहा है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ के कुछ पूर्व कर्मचारियों द्वारा CJI को लिखे गए एक पत्र का संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार को सोमवार को निर्देश दिया कि वह राज्य में बॉम्बे हाई कोर्ट की पीठ के उन पूर्व कर्मचारियों के लिए जल्द से जल्द नियम तैयार करे, जिन्हें सेवानिवृत्ति के तीन से सात वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक उनकी पेंशन राशि का भुगतान नहीं किया गया है। सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला की पीठ को गोवा सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने बताया कि ऐसे 21 कर्मचारियों में से 19 को अंतरिम पेंशन लाभ का भुगतान किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम समझौता करने के लिए हमें नियम बनाने की जरूरत है, जो किया जा रहा है। जल्द ही इन नियमों को अधिसूचित किया जाएगा।

 इस पर पीठ ने कहा कि यह एक हाई कोर्ट के कर्मियों का मुद्दा है। बॉम्बे हाई कोर्ट में समान कार्य करने वाले व्यक्तियों को पेंशन लाभ का भुगतान किया जाता है, लेकिन गोवा में ऐसा नहीं हो रहा है। समान कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए दो नियम नहीं हो सकते। इससे पीड़ित होकर एक कर्मचारी ने आत्महत्या भी कर ली गई। ऐसे में अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। पीठ ने गोवा को यह भी निर्देश दिया कि मृतक कर्मी के कानूनी उत्तराधिकारियों को खोज कर उन्हें भुगतान करें। आगे पीठ ने कहा कि नियमों का निर्माण और अनुमोदन जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। फिलहाल अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई दो सप्ताह के बाद सूचीबद्ध की है।  
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बता दें कि शीर्ष अदालत ने यह निर्देश बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ के कुछ पूर्व कर्मचारियों द्वारा CJI को लिखे गए एक पत्र के आधार पर दिया है। इसमें कहा गया था कि तीन से सात साल बीत जाने के बावजूद उनकी पेंशन बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है। जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे एक याचिका में बदलते हुए सुनवाई शुरू की। अदालत ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र और गोवा की सरकारों और बॉम्बे उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया।

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