स्कूली छात्राओं के लिए माहवारी स्वच्छता प्रबंधन व सेनेटरी पैड्स उपलब्ध करवाना ‘बेहद महत्वपूर्ण’ विषय मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एकसमान राष्ट्रीय नीति लागू करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा, केंद्र को यह देखने के लिए सभी प्रदेशों के साथ जुड़ना चाहिए कि राज्य समायोजन के साथ समान नीति को लागू कर सकें। केंद्र को समस्त निर्देशों पर जुलाई, 2023 के अंत तक अपडेट रिपोर्ट देने को कहा गया है।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने डॉ. जया ठाकुर की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कहा, राष्ट्रीय नीति बनाने और लागू करने के लिए केंद्र सभी राज्यों व भागीदार पक्षों को शामिल करे। समन्वय के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव नोडल अधिकारी होंगे। वह राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से नीतियों पर डाटा जमा करेंगे, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम हो सके। राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशाें से भी उनकी नीतियों, केंद्र या खुद की फंडिंग से लागू योजनाओं की जानकारियां चार सप्ताह में तलब की गई हैं। जानकारियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बने मिशन संचालन समूह को दी जाएंगी। 10 साल के अनुभवों के आधार पर समूह राष्ट्रीय गाइडलाइंस का भी पुनर्मूल्यांकन करेगा। ब्यूरो
यह जानकारी भी तलब
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सभी राज्य व केंद्रशासित प्रदेश अपने यहां रिहायशी व गैर-रिहायशी स्कूलों में महिला शौचालयों के अनुपात के बारे में भी बताएंगे। साथ ही, स्कूलों में सस्ते सेनेटरी पैड्स के लिए वेंडिंग मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता ने यह कहा था
सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी पैड्स उपलब्ध करवाने के निर्देश के लिए याचिका दायर की गई थी। कमजोर पृष्ठभूमि की किशोरियों को उनके माता-पिता सही जानकारी नहीं दे पाते। उन्हें स्कूल तक छोड़ना पड़ता है। शिक्षा व स्वास्थ्य, दोनों उनके लिए मुश्किल हो जाता है।
जनस्वास्थ्य राज्यों का विषय
केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मंत्रालयों ने विभिन्न गाइडलाइंस जारी की हैं, प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रम करवाए हैं। जनस्वास्थ्य राज्यों का विषय है, इसलिए सेवाएं देना राज्यों के जिम्मे है। सांस्कृतिक सीमाओं के चलते पारंपरिक तरीके स्वच्छता व प्रजनन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं। लिहाजा सरकार गांवों में अच्छी गुणवत्ता के सेनेटरी पैड्स प्रदान करने पर जोर दे रही है।
चार हफ्ते के भीतर मांगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार हफ्ते के भीतर सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय को बताने के लिए कहा है कि मासिक धर्म स्वच्छता नीतियों को उनके स्वयं के कोष से चलाया जा रहा है। पीठ ने कहा, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आवासीय और गैर-आवासीय विद्यालयों में लड़कियों के शौचालयों के उचित अनुपात को अधिसूचित करें।