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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, बच्चों में ड्रग की लत को रोकने के लिए क्या कदम उठाए? 

Mon, 09 Jul 2018 06:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों में बढ़ती ड्रग की लत का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अदालत के वर्ष 2016 के फैसले के अनुपालन के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं?। कोर्ट ने इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाने का भी निर्देश दिया था। दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कैलाश सत्यार्थी के गैर सरकारी संगठन ‘बचपन बचाओ’ की जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे और केंद्र से कहा था कि स्कूली बच्चों के बीच नशे की लत को रोकने के लिए वह छह महीने के भीतर राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाए।

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कोर्ट ने राष्ट्रीय सर्वेक्षण का निर्देश भी दिया था ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्कूली बच्चों के बीच नशे ने किस हद तक पैठ बना ली है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि फैसले के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों के बारे में सूचित करने के लिए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद को समय दिया जाता है और मामले पर सुनवाई 20 अगस्त को होगी। एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने कहा था कि केंद्र फैसले का अनुपालन करने में विफल रहा है।

एक्शन प्लान बनाने के अलावा बेंच ने सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे कर नशे की लत फंसे बच्चों का पता लगाने का निर्देश भी दिया था। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से नशे के गंभीर परिणाम को लेकर जागरूकता अभियान चलाने को कहा था। इसके साथ ही नशे के साइड इफैक्ट के विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का भी निर्देश दिया था। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक पिछले साल कानून के समक्ष पेश होने वाले 100 फीसदी बच्चे नशे के आदी थे। 

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