सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि जब एनआईए अधिनियम में गवाहों के संरक्षण को लेकर विशेष प्रावधान है तो क्यों नहीं गवाहों के संरक्षण को लेकर देशव्यापी योजना का मसौदा तैयार किया गया है। न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि गृह मंत्रालय को गवाहों केसंरक्षण को लेकर कम से कम योजना का मसौदा तो तैयार करना ही चाहिए। पीठ ने इस मामले में अटॉनी जनरल केके वेणुगोपाल से सलाह मांगी है।
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पीठ ने कहा कि हम यह समझते हैं कि लाखों मामले हैं लेकिन संवेदनशील मामलों के गवाहों के संरक्षण केलिए तो कुछ किया ही जा सकता है। क्यों नहीं गृह मंत्रालय गंभीर मामलों केगवाहों के संरक्षण को लेकर इसे लेकर कोई नीति बनाती है। पीठ ने सभी राज्यों को छह हफ्ते के भीतर अपने-अपने गवाह संरक्षण नीति केअनुपालन को लेकर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। वहीं इस मामले में नियुक्त अमाइकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने पीठ को बताया कि उन्होंने इस संबंध में केंद्र और सभी राज्यों के मुख्य सचिव और गृह सचिवों को पत्र लिखा है।
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मालूम हो कि शीर्ष अदालत आसाराम मामले में गवाहों की सुरक्षा देने के मसले पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने पाया कि आसाराम पर केखिलाफ चल रहे बलात्कार केदो मामलों के तीन गवाहों की हत्या हो चुकी है और करीब एक दर्जन लोगों पर जानलेवा हमले हुए हैं। याचिकाकर्ताओं में से एक वर्ष 2001 से 2005 के बीच आसाराम का निजी सहायक रह चुका है।
उस पर मई 2015 में पानीपत स्थित उसकेनिवास पर जानलेवा हमला हुआ था। अन्य याचिकाकर्ता में एक बलात्कार पीड़िता केपिता, मृतक गवाह केपिता और एक पत्रकार शामिल है। इस पत्रकार पर भी जानलेवा हमला हो चुका है। शुरुआत में जब यह मामला आया था उस वक्त शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और राजस्थान को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था क्योंकि गवाह इन्हीं राज्यों से थे। लेकिन अब पीठ ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए सभी राज्यों को शामिल कर लिया है।