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आधार पर सुनवाई: SC ने सिब्बल से पूछा- क्या 'एक देश एक पहचान' का आइडिया गलत है?

Thu, 08 Feb 2018 10:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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aadhaar
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आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट पिछले कुछ महीनों से सुनवाई कर रहा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान आधार कार्ड पर बनी पांच जजों की पीठ के जज अशोक भूषण ने पूछा कि एक राष्ट्र एक पहचान में क्या गलत है? 
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सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें उस वक्त कही जब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से आधार की वैधता पर बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि यह दवाब नहीं बनाया जा सकता कि मेरे पास आधार नहीं तो मैं भारतीय नहीं हूं। सिब्बल ने कहा कि आधार को अनिवार्य बनाकर देश की जनता को बाध्य किया जा रहा है कि वह अपनी हर सूचना सरकार को दे और सरकार को शक्तिशाली बना दे। 

 बहस के दौरान सिब्बल ने कोर्ट से पूछा कि क्या आप यह कह रहे हैं कि एक देश में एक पहचान या एक देश एक धर्म में कुछ भी गलत नहीं है? इसके जवाब में जस्टिस ए के सीकरी ने कहा कि आप राजनीतिक तर्कों में न जाएं।
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कपिल सिब्बल ने  न्यायाधीश सीकरी से कहा कि वह साबित करेंगे कि यह एक कानूनी तर्क है इसका राजनीति से कोई लेना देना नही है। उन्होंने बहस में कहा जिस तरह से केंद्र आम जनजीवन और मूलभूत सुविधाओं को आधार से जोड़ रही है उससे यह साबित होता जा रहा है कि जिसके पास आधार नहीं है वह देश का नागरिक ही नहीं है।
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मैं भी एक भारतीय हूं और मेरी पहचान सिर्फ आधार नहीं

सुप्रीम कोर्ट
सिब्बल ने कहा कि हम भारतीय हैं और यह हमारे लिए गर्व की बात है। इसके बाद सिब्बल ने कहा कि मैं भी एक भारतीय हूं और मेरी पहचान सिर्फ आधार नहीं बल्कि पहचान के देश में दूसरे तरीके भी हैं। उन्होंने कहा कि  मैं कहना चाह रहा हूं कि सारी शक्ति राज्य और सरकार को देना खतरनाक है। इस डिजिटल दुनिया में आप मुझे डेटा की हैकिंग के लिए कमजोर बना रहे हैं।

अगर किसी का पहचान पत्र चोरी हो जाता है तो वह हमेशा के लिए चोरी हो जाएगा। वह कभी वापस नहीं पाया जा सकेगा।उन्होंने कहा कि इस देश में हर आदमी के पास कई-कई पहचान पत्र होते हैं- ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, पासपोर्ट फिर ऐसे में हर जगह आधार का मांगा जाना कहां तक उचित है। 

इस बहस के बाद पीठ ने कहा कि सरकार ने आधार मामले में किसी भी तरह का समझौता करने से मना कर दिया है। सिबल बोले सरकार मना नहीं कर सकती है। डिजिटल वर्ल्ड में कोई भी डाटा के सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकता है। और कोई नहीं जानता कि डाटा को 100 फीसदी सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। बता दें कि गुरुवार को भी इस मामले में सुनवाई जारी रहेगी। 
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