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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: शिक्षक भर्ती में ट्रांसजेंडर्स को शामिल क्यों नहीं किया? सरकार से मांगा जवाब

Tue, 20 Oct 2026 06:04 PM IST
नितिन गौतम आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

शिक्षक भर्ती में ट्रांसजेंडर्स को शामिल नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर दिल्ली सरकार से सवाल किए हैं और 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के पदों पर भर्ती के लिए जारी अधिसूचनाओं में थर्ड जेंडर को शामिल नहीं किए जाने के मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए रिक्त पदों को अलग-अलग निर्धारित करने के कानूनी आधार और सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अवसर देने के तरीकों को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने पूछे ये सवाल
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सरकार को 15 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) की ओर से निकाली गई भर्तियों के नियमों के संबंध में कई सवाल पूछे। जस्टिस पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि क्या भर्ती नियमों के तहत शिक्षकों के पदों के लिए पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग विज्ञापन जारी करना अनिवार्य है? अगर ऐसा नहीं है, तो इस तरह के वर्गीकरण का उद्देश्य क्या है?

ट्रांसजेंडर्स को भर्ती में शामिल नहीं करने पर जताई नाराजगी
शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा कि क्या संबंधित प्राधिकारी डीएसएसएसबी के माध्यम से जारी भर्ती अधिसूचनाओं में थर्ड जेंडर को शामिल करने का प्रस्ताव रखते हैं और सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को किस तरह समायोजित किया जाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने प्रवीण सिंह की ओर से हाल में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। इस याचिका में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और आयु सीमा में छूट देने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
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शीर्ष अदालत ने ट्रांसजेंडर्स के मुद्दे पर पूर्व न्यायमूर्ति आशा मेनन की अध्यक्षता में एक सलाहकार समिति का भी गठन किया था। इस समिति को समान अवसर नीति, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए उचित सुविधाएं और समायोजन, शिकायत निवारण तंत्र, लिंग और नाम परिवर्तन, समावेशी चिकित्सा देखभाल तथा विभिन्न लैंगिक पहचान वाले व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा सहित कई मुद्दों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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