कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद (फाइल फोटो)
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पिछले कुछ वर्षों के दौरान राजनीतिज्ञों की बढ़ती तनख्वाह और संपत्ति से उच्चतम न्यायालय चिंतित है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि उसने अभी तक पिछले कुछ सालों में राजनीतिक उम्मीदवारों की संपत्ति या आय में हुई अभूतपूर्व वृद्धि की जांच करने के लिए किसी स्थायी तंत्र का गठन क्यों नहीं किया है।
अदालत ने इस मामले में कानून मंत्रालय से दो हफ्तों के अंदर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी पूछा कि फार्म-26 में वह घोषणा शामिल क्यों नहीं की गई, जिसमें प्रत्याशी यह घोषणा करे कि वह जनप्रतिनिधित्व कानून के किसी प्रावधान के तहत अयोग्य नहीं है।