सार
दिल्ली की सेंट्रल रिज को अतिक्रमणकारी पेड़ों और झाड़ियों से मुक्त करने की योजना को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने विलायती कीकर, बबूल और यूकेलिप्टस जैसे पेड़ों को हटाकर नीम, बरगद, पीपल, जामुन और अमलतास लगाने की अनुमति दी है। करीब 13 हजार पेड़ अभी हटाए जाने हैं। लेकिन पुराने पेड़ों को हटाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान का सवाल भी उठ रहा है। यह फैसला क्यों लिया गया? आइए, विस्तार से जानते हैं...
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली की सेंट्रल रिज से आक्रामक प्रजातियों के पेड़ हटाने की दिल्ली सरकार के वन विभाग की योजना को मंजूरी दे दी। सेंट्रल रिज को दिल्ली के हरित फेफड़ों के रूप में जाना जाता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि विलायती कीकर, बबूल और यूकेलिप्टस जैसी प्रजातियों को हटाकर उनकी जगह स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं। इसके तहत नीम, बरगद, पीपल, जामुन और अमलतास जैसे पेड़ लगाए जाने हैं।
किस योजना के तहत होगी पेड़ों की कटाई और पौधरोपण?
कोर्ट ने साफ किया कि पेड़ हटाने और नए पौधे लगाने का काम दिल्ली इको-रिस्टोरेशन प्लान 2026-30 के तहत होगा। यह योजना देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान ने तैयार की है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड करेगा। वन विभाग को अंतरिम अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी। साथ ही वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक विशेषज्ञों की एक टीम बनाएंगे, जो इस योजना को जमीन पर लागू किए जाने की प्रक्रिया की जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में शुरू हुई अवमानना की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है।
कितने पेड़ हटाने और कितने नए पौधे लगाने की योजना है?
- 191 हेक्टेयर क्षेत्र से 22,188 आक्रामक पेड़ हटाए जाने हैं।
- इनकी जगह करीब 7.29 लाख पेड़ और झाड़ियां लगाई जानी हैं।
- करीब 9,000 आक्रामक पेड़ हटाए जा चुके हैं।
- करीब 120 हेक्टेयर में 5.31 लाख पेड़ और झाड़ियां लगाई गई हैं।
- करीब 13,161 आक्रामक पेड़ करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में हटाए जाने हैं।
- विलायती कीकर, बबूल और यूकेलिप्टस हटेंगे।
- नीम, बरगद, पीपल, जामुन और अमलतास लगाए जाएंगे।
पुराने पेड़ों को हटाने पर क्या आपत्ति जताई गई?
अरावली बचाओ सिटिजंस मूवमेंट के प्रबंध न्यासी लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) सरवदमन सिंह ओबेरॉय ने दिल्ली हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। इसमें सेंट्रल रिज में निर्माण, सफाई और खुदाई से जुड़े अदालती आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को सेंट्रल रिज में किसी भी तरह के निर्माण, सफाई, खुदाई या पेड़-पौधों को हटाने पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि उन्हें नए पेड़ लगाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन पुराने पेड़ उखाड़ने के तरीके से खनिजों से भरपूर ऊपरी मिट्टी को नुकसान पहुंच रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने विलायती कीकर और यूकेलिप्टस को लेकर क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यूकेलिप्टस और विलायती कीकर जैसी प्रजातियां भूमिगत जल स्तर को कम करती हैं और मिट्टी को भी नुकसान पहुंचाती हैं। उनके मुताबिक इन पेड़ों की जड़ें पूरी तरह नहीं हटाई गईं तो ये दोबारा उग सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 1970 के दशक में कागज उद्योग बढ़ने के दौरान किसानों ने इनके नुकसान को जाने बिना यूकेलिप्टस जैसे पेड़ लगाए थे। अब किसान इनके विकल्प के तौर पर पर्यावरण के अनुकूल पोपलर पेड़ लगा रहे हैं। वन विभाग की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पेड़ हटाने का काम मंजूर योजना के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मानसून सितंबर में खत्म हो जाएगा और सितंबर के बाद पौधरोपण करने पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे।