सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और अन्य के खिलाफ जांच को मंजूरी दे दी। इन पर 2002 के गोधरा दंगों के बाद झूठे सबूत गढ़ने का आरोप है। सीतलवाड़ और उनके एनजीओ सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस ने अपने सहयोगी रईस खान पठान और अन्य के खिलाफ जांच के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को बरकरार रखने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
पढ़ें- गुजरात पुलिस ने कहा, 2002 दंगा पीड़ितों के फंड का सितलवाड़ ने किया गलत इस्तेमाल
अपील के लंबित रहने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2011 को हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे (रोक)दे दिया था। हाईकोर्ट ने नरोदा गाम दंगा मामले में झूठे सबूत गढ़ने के आरोप में पठान और अन्य के खिलाफ जांच को स्वीकृति दी थी। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमएम शांतनगौदर ने याचिका खारिज करते हुए उन्हें निचली कोर्ट में अपील करने की छूट दे दी। याचिका के खारिज होने से हाईकोर्ट के आदेश लगा स्टे भी समाप्त हो गया और इस मामले में अब जांच हो सकती है।