सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए 17 साल से अलग रह रहे पश्चिम बंगाल के दो जिला जजों के तलाक को मंजूरी दे दी। जस्टिस कए बोबडे और एल. नागेश्वरा राव की पीठ ने यह देखते हुए कि पत्नी अपने पति के साथ रहने की इच्छुक नहीं है और उसने कभी भी अदालत की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया, तलाक की याचिका मंजूर कर ली।
अदालत ने कहा कि तलाक की प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करना और लगभग मृतप्राय शादी में जबरदस्ती याची (पति) को बांधे रखना मानसिक क्रूरता है।
इस संबंध में शीर्ष न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 में दिए गए अधिकार का प्रयोग कर तलाक को मंजूरी दी। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने साल 2012 में तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था।