- एजीआर का भुगतान के आदेश को कमतर करने वाले अफसर पर कार्रवाई न करने से सुप्रीम कोर्ट खफा
- सरकार से पूछा, आपने दूरसंचार विभाग के अफसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की, यह बर्दाश्त नहीं
यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता
करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का भुगतान करने के आदेश को कमतर करने वाले दूरसंचार विभाग के अधिकारी पर कार्रवाई न किए जाने से सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार पर भी सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सरकार ने उस अफसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पीठ ने दूरसंचार कंपनियों के रवैये पर यह भी कहा, देश में जिस तरह से चीजें हो रही हैं, इससे हमारी अंतरात्मा हिल गई है। हमें पता है कि यह सब पैसे के बल पर हो रहा है। इस पर मेहता ने जब यह कहा कि वह इस पूरे प्रकरण को देखेंगे तो जवाब में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उस अधिकारी के काम पर रोक लगाई जानी चाहिए थी। पीठ ने मेहता से कहा, आप देश के सॉलिसिटर जनरल हैं।
क्या आपने डेस्क ऑफिसर को वह आदेश वापस लेने के लिए कहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम इस तरीके से काम नहीं कर सकते। अगर डेस्क ऑफिसर इस तरह से दुस्साहस करेंगे तो सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दिया जाना चाहिए। न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जा रही है। आखिर इन सभी को प्रायोजित कौन कर रहा है। मुझे अपनी चिंता नहीं है। आप मुझे नहीं समझते, एक इंच भी नहीं। डेस्क ऑफिसर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लगा रहे हैं।
पीठ ने यह भी कहा, क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई महत्व नहीं है। यह सब पैसे के बल पर हो रहा है। आखिर देश में हो क्या रहा है। अब तक इन कंपनियों ने एक पैसे का भुगतान नहीं किया है और एक डेस्क अधिकारी ने दुस्साहस करते हुए अदालत के आदेश पर रोक लगा दी।
90 दिनों में 92 हजार करोड़ बकाये के भुगतान का दिया था आदेश
गत वर्ष 24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों को 90 दिनों के भीतर बकाया 92,000 करोड़ रुपये बतौर एजीआर जमा करने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि एजीआर की गणना करने में नॉन-कोर आइटम को भी शामिल किया जाना चाहिए। कंपनियों पर एजीआर और ब्याज को मिलकर रकम बढ़कर अब करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गई है। गत 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था। और अब कंपनियों ने भुगतान के लिए और समय देने की गुहार की है।
सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम ऑपरेटरों को बकाया समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान करने के लिए और वक्त देने से इनकार कर दिया। इसी के साथ कोर्ट ने टेलीकॉम ऑपरेटरों की पुनर्विचार याचिका ठुकरा दी।
एयरटेल ने 20 तक 10 हजार करोड़ देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारती एयरटेल ने बाकायदा पत्र जारी कर 20 फरवरी तक अपने कुल बकाये में से 10 हजार करोड़ रुपये के भुगतान की बात कही है। कंपनी ने कहा है कि बाकी का पैसा वह सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले देगी।