फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट जिस 'अफसर' के 'दुस्साहस' पर इतना नाराज, उसके आदेश का मंत्री-सचिव को पता ही नहीं

Sat, 15 Feb 2020 03:22 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

नाराज सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि अफसर का यह दुस्साहस, हमारा कोई महत्व ही नहीं? कोर्ट ने यह भी पूछा कि हमारे आदेश को रोकने वाले अफसर पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं? खास बात यह है कि अपने अफसर के आदेश के बारे में मंत्री और सचिव को पता ही नहीं था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि, क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई महत्व नहीं है। इन कंपनियों ने एक पैसे का भुगतान नहीं किया है और एक डेस्क अधिकारी ने दुस्साहस करते हुए अदालत के आदेश पर रोक लगा दी। सरकार ने उस अफसर पर क्या कार्रवाई की। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। 

विज्ञापन


मेहता ने जब यह कहा कि वह इस पूरे प्रकरण को देखेंगे तो जवाब में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उस अधिकारी के काम पर रोक लगाई जानी चाहिए थी। पीठ ने मेहता से कहा, आप सॉलिसिटर जनरल हैं। क्या आपने डेस्क ऑफिसर को वह आदेश वापस लेने के लिए कहा? हम इस तरीके से काम नहीं कर सकते। आखिर इन सभी को प्रायोजित कौन कर रहा है। मुझे अपनी चिंता नहीं है। आप मुझे नहीं समझते, एक इंच भी नहीं। 

गत वर्ष 24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों को 90 दिनों के भीतर बकाया 92,000 करोड़ रुपये  जमा करने का निर्देश दिया था। कंपनियों पर एजीआर और ब्याज को मिलकर रकम बढ़कर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गई है। गत 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था। ब्यूरो
विज्ञापन


डीओटी के वित्त सदस्य की मंजूरी से डेस्क अफसर ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर आए दूरसंचार विभाग (डीओटी) के डेस्क अफसर मंदार देशपांडे भारतीय लेखा एवं वित्त सेवा अधिकारी हैं। मंदार ने कहा था कि बकाये की रकम नहीं चुका पाने वाली कंपनियों पर कोई कार्रवाई न की जाए। अफसर ने यह आदेश विभाग में वित्त सदस्य की मंजूरी के बाद जारी किया था। देशपांडे ने जब आदेश जारी किया था तो वह उस वक्त विभाग में लाइसेंसिंग वित्त नीति शाखा में निदेशक थे। शीष कोर्ट ने विभाग के निदेशक अंकुर कुमार पर भी अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी है। 

पर दूरसंचार मंत्री-सचिव को कंपनियों पर नरमी के आदेश का नहीं था पता
डीओटी द्वारा एजीआर न देने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आदेश दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद और डीओटी सचिव से मंजूरी लिए बिना 23 जनवरी को जारी किया गया था। यह जानकारी एक अधिकारी ने उसका नाम न छापने की शर्त पर दी। सूत्रों ने बताया कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

अब कोर्ट में ए-4 साइज के पेपर में भी दाखिल हो सकेंगे दस्तावेज
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण के हितों को देखते हुए आखिरकार ए-4 साइज के पेपर पर दस्तावेज दाखिल करने की इजाजत दे दी। इतना ही नहीं पेपर के दोनों तरह प्रिंट हो सकते हैं। अब तक अदालत में सिर्फ लीगल साइज पेपर पर ही दस्तावेज दाखिल होते थे और वह भी पेपर पर एक ही तरह प्रिंट होता था। सुप्रीम कोर्ट की एक कमेटी की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकार्ड एसोसिएशन केपदाधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस बारे में बृहस्पतिवार को ही सर्कुलर जारी कर दिया गया।

हमें पता है कि यह सब पैसे के बल पर हो रहा, हमारी अंतरात्मा तक हिल गई: सुप्रीम कोर्ट

  • एजीआर का भुगतान के आदेश को कमतर करने वाले अफसर पर कार्रवाई न करने से सुप्रीम कोर्ट खफा
  • सरकार से पूछा, आपने दूरसंचार विभाग के अफसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की, यह बर्दाश्त नहीं
यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता
करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का भुगतान करने के आदेश को कमतर करने वाले दूरसंचार विभाग के अधिकारी पर कार्रवाई न किए जाने से सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार पर भी सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सरकार ने उस अफसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

पीठ ने दूरसंचार कंपनियों के रवैये पर यह भी कहा, देश में जिस तरह से चीजें हो रही हैं, इससे हमारी अंतरात्मा हिल गई है। हमें पता है कि यह सब पैसे के बल पर हो रहा है।  इस पर मेहता ने जब यह कहा कि वह इस पूरे प्रकरण को देखेंगे तो जवाब में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उस अधिकारी के काम पर रोक लगाई जानी चाहिए थी। पीठ ने मेहता से कहा, आप देश के सॉलिसिटर जनरल हैं।

क्या आपने डेस्क ऑफिसर को वह आदेश वापस लेने के लिए कहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम इस तरीके से काम नहीं कर सकते। अगर डेस्क ऑफिसर इस तरह से दुस्साहस करेंगे तो सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दिया जाना चाहिए। न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जा रही है। आखिर इन सभी को प्रायोजित कौन कर रहा है। मुझे अपनी चिंता नहीं है। आप मुझे नहीं समझते, एक इंच भी नहीं। डेस्क ऑफिसर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लगा रहे हैं। 

क्या सुप्रीम कोर्ट की कोई अहमियत नहीं

पीठ ने यह भी कहा, क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई महत्व नहीं है। यह सब पैसे के बल पर हो रहा है। आखिर देश में हो क्या रहा है। अब तक इन कंपनियों ने एक पैसे का भुगतान नहीं किया है और एक डेस्क अधिकारी ने दुस्साहस करते हुए अदालत के आदेश पर रोक लगा दी।

90 दिनों में 92 हजार करोड़ बकाये के भुगतान का दिया था आदेश
गत वर्ष 24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों को 90 दिनों के भीतर बकाया 92,000 करोड़ रुपये बतौर एजीआर जमा करने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि एजीआर की गणना करने में नॉन-कोर आइटम को भी शामिल किया जाना चाहिए। कंपनियों पर एजीआर और ब्याज को मिलकर रकम बढ़कर अब करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गई है। गत 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था। और अब कंपनियों ने भुगतान के लिए और समय देने की गुहार की है।

1.47 लाख करोड़ का बकाया: किस पर कितना

  • वोडाफोन-आइडिया: 53,038 करोड़
  • भारती एयरटेल: 35,586 करोड़
  • टाटा टेलीकॉम: 13,823 करोड़
  • रिलायंस जियो समेत बाकी कंपनियों पर बकाया: 45,000 करोड़
  • सभी कंपनियों पर कुल बकाया: 1,47,447 करोड़ 
  • रिलायंस जियो ने चुकाए: 195 करोड़ 
  • अब बकाया: 1,47,252 करोड़
विज्ञापन

ऑपरेटरों को और वक्त देने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम ऑपरेटरों को बकाया समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान करने के लिए और वक्त देने से इनकार कर दिया। इसी के साथ कोर्ट ने टेलीकॉम ऑपरेटरों की पुनर्विचार याचिका ठुकरा दी।

एयरटेल ने 20 तक 10 हजार करोड़ देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारती एयरटेल ने बाकायदा पत्र जारी कर 20 फरवरी तक अपने कुल बकाये में से 10 हजार करोड़ रुपये के भुगतान की बात कही है। कंपनी ने कहा है कि बाकी का पैसा वह सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले देगी। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें