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शराब बैनः सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, शहर के बीच गुजरने वाले हाईवे पर फिर से खुलेंगी दुकानें

Tue, 11 Jul 2017 04:59 PM IST
amarujala.com- Written By: अनंत पालीवाल
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को हाईवे से 500 मीटर दूर शराब की दुकानें खोलने के आदेश पर राहत देते हुए शहर के बीच से गुजरने वाले हाईवे को इस सूची से बाहर कर दिया है। अब शहरी सीमा के बाहर पड़ने वाले हाईवे पर ही 500 मीटर के बाद शराब की दुकानें खुलेंगी। वहीं शहर के बीच से गुजर रहे हाईवे पर शराब की दुकानें एक बार फिर से खुल सकेंगी। 

इसके साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले पर समीक्षा करने सहमति दे दी है। इसके लिए संबंधित लोगों को समीक्षा याचिका दायर करनी होगी। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे शराब की दुकाने हटाने को लेकर कोर्ट ने कहा था कि लोगों की सेहस सबसे पहले है।
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शीर्ष अदालत के आदेशानुसार पहली अप्रैल से राजमार्गों के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें हटाई गई हैं। अदालत में शाराब कारोबारियों की लगातार याचिकाएं पहुंच रही हैं। इससे पहले मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि 'बैलेंस अप्रोच' की दरकार है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में सभी हितधारकों को विकल्प सुझाने के लिए कहा था।
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अपनाए जा रहे थे तमाम तरह के हथकंडे

देश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बाईपास करने के लिए तमाम तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने जब से नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के किनारे शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाई है, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान सहित अन्य राज्यों ने हजारों किलोमीटर सड़कों का दर्जा बदलकर स्थानीय, नगरपालिका या जिला स्तरीय कर दिया है।

ज्यादातर राज्यों ने हाईवे का दर्जा बदलने के लिए कोई ठोस कारण नहीं दिया है। कुछ ने तो इस बात से भी इनकार किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण ऐस कदम उठाया गया है। हालांकि ज्यादातर मामलों में 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने के बाद से ही यह ट्रेंड चल पड़ा है।

महाराष्ट्र ने तीन प्रस्तावों को मंजूरी देकर राज्य से गुजरने वाले हाईवे को शहरी सड़क का दर्जा देने का आदेश दिया। वहीं, हिमाचल प्रदेश ने राज्य से गुजरने वाले 16 हाईवे को बड़े जिला सड़कों में तब्दील करने का फरमान सुना दिया।

बंगाल में 275 किलोमीटर हाईवे को नगर निकाय में बदला
पश्चिम बंगाल सरकार ने उसके राज्य से गुजरने वाले 275 किलोमीटर हाईवे को नगर निकाय स्तरीय सड़क में तब्दील करने को कहा है। यह अधिसूचना 16 मार्च को पीडब्ल्यूडी की वेबसाइट पर डाली गई, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2016 को हाईवे के किनारे शराब पर पाबंदी का आदेश दिया था और इस वर्ष 31 मार्च को उस पर अंतिम मुहर लगा दी थी।

उत्तराखंड सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लिया। वहां विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर शराब कारोबारियों को मदद पहुंचाने का आरोप लगाया। और तो और नशे की गिरफ्त में रहा पंजाब ने भी सात हाईवे को डीनोटिफाइड कर उसे स्थानीय सड़क का दर्जा दे दिया है। इन सबके इतर गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर ने कहा है कि भारत बहुत बड़ा देश है। उसमें गोवा एक पर्यटन राज्य है, हमें कुछ छूट चाहिए।
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