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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी मां के पक्ष में सुनाया फैसला, बीमार बेटे को साथ ले जाने की दी अनुमति

Mon, 03 Mar 2025 09:53 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: पीठ ने यह फैसला मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मां शर्मिला वेलामुर की याचिका पर सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा था कि पिता ने चेन्नई में बेटे को अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा है।
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उपासना स्थल कानून पर नई याचिकाओं से सुप्रीम कोर्ट नाराज - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक रूप से बीमार एक व्यक्ति की देखभाल की जिम्मेदारी उसकी अमेरिकी मां को सौंप दी और अपने साथ अमेरिका ले जाने की अनुमति भी दे दी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित व्यक्ति के हित में यही सही है क्योंकि वह स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में असमर्थ है।

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जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि 22 वर्षीय व्यक्ति की मानसिक स्थिति आठ से 10 साल के बच्चे की जैसी है। पीठ ने व्यक्ति के पिता से कहा कि वह उसे अपनी मां के साथ अमेरिका लौटने से नहीं रोकें। वह सेरेब्रल पाल्सी नामक बीमारी से पीड़ित है। यह बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है वह चलने-फिरने में असमर्थ होता है और उसका मानसिक विकास भी नहीं हो पाता।

पीठ ने यह फैसला मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मां शर्मिला वेलामुर की याचिका पर सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा था कि पिता ने चेन्नई में बेटे को अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा है। वेलामुर ने दावा किया कि तलाक के बाद जबकि इडाहो में बेटे की मध्यस्थता और संरक्षकता की कार्यवाही लंबित थी, पिता बेटे के साथ अमेरिका से चेन्नई चले गए और उन्हें पता नहीं चल पाया। मद्रास उच्च न्यायालय ने बेटे से बातचीत की उससे कई सवाल पूछे और जवाबों के आधार पर यह निर्धारित किया कि उसे अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया।
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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बेटे को बेंगलुरु में चिकित्सा मूल्यांकन से गुजरने का निर्देश दिया गया था, और विशेषज्ञों की रिपोर्ट से पता चला कि वह आठ से 10 साल के बच्चे के जैसा व्यवहार नहीं करता है और खुद से निर्णय लेने में असमर्थ है।न्यायालय ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, हल्के बौद्धिक विकास संबंधी विकार और मस्तिष्क पक्षाघात के कारण उसकी गंभीर विकलांगता की श्रेणी में आती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय का निर्णय "केवल...(पुत्र) के साथ कुछ मिनटों की मौखिक बातचीत पर आधारित था। हम यह मानने के लिए बाध्य हैं कि उच्च न्यायालय का निर्णय मामले की बारीकियों पर पूरी तरह विचार किए बिना जल्दबाजी में पारित किया।यदि उच्च न्यायालय को रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों की विश्वसनीयता पर कोई संदेह था, तो उसे किसी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के माध्यम से जांच का आदेश देना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने वेलामुर को 15 दिनों के भीतर बेटे के साथ अमेरिका लौटने का निर्देश दिया। पिता को आदेश दिया गया कि वह उनकी वापसी में "कोई बाधा" न डालें।

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