प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों के फैसले से जुड़ी पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट 25 अगस्त को सुनवाई करेगी। सीजेअई एनवी रमण, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने मामले को सुनने पर सहमति जताई। कार्ति ने सुप्रीम कोर्ट में ईडी की शक्तियों को बरकरार रखने के 27 जुलाई के फैसले पर फिर से विचार करने के लिए याचिका दाखिल की थी।
सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति का देश में कोई मूल्य नहीं : सीजेआई
वहीं, भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन वी रमण ने बुधवार को कहा कि जो व्यक्ति देश में सेवानिृवत्त होता है या सेवानिवृत्त होने वाला है, उसका इस देश में कोई मूल्य नहीं है। 26 अगस्त को वह सीजेआई के पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सीजेआई की यह टिप्पणी चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त वादों से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। पीठ में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सी टी रविकुमार भी मौजूद थे।
याचिकाकर्ता अश्विन उपाध्याय के वकील ने सुझाव दिया कि इस पहलू पर गठित की जाने वाली समिति का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज होना चाहिए। इस पर सीजेआई रमण ने कहा, सेवानिवृत्त व्यक्ति की देश में कोई कीमत नहीं है। यही दिक्कत है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह संबंधित व्यक्ति का व्यक्तित्व है, जिससे फर्क पड़ता है।