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दागी नेताओं के खिलाफ विशेष अदालतें एक मार्च से करें सुनवाईः सुप्रीम कोर्ट

Thu, 14 Dec 2017 09:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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 सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दागी सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे के लिए एक मार्च से 12 विशेष अदालतों को शुरू करने का आदेश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार को दो माह के अंदर यह बताने को कहा है कि कितने सांसदों व विधायकों के खिलाफ मामले लंबित हैं। 
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जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने सरकार को विशेष अदालतों के लिए 7.80 करोड़ का फंड भी जारी करने को कहा। यह रकम उन राज्यों को दी जाएगी जहां विशेष अदालतों का गठन किया जाना है। पीठ ने कहा कि फंड मिलने के बाद राज्य सरकार संबंधित हाईकोर्ट से सलाह कर विशेष अदालत का गठन करेगी। हाईकोर्ट इन अदालतों के लिए न्यायिक अधिकारी नियुक्त करेगा। पीठ ने कहा कि 12 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों का गठन महज शुरुआत है। जरूरत के हिसाब से इस संदर्भ में और निर्देश जारी किए जाएंगे।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं की उस मांग को ठुकरा दिया कि करीब 1581 दागी सांसदों व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित है, ऐसे में और विशेष अदालतों का गठन किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि फिलहाल इसकी जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए सांसद व विधायकों पर आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी की मांग वाली याचिका पर अगले साल  7 मार्च को सुनवाई होगी।
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एक वर्ष में मुकदमों को निपटाना लक्ष्य
केंद्र सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इन 12 विशेष अदालतों के जरिए एक वर्ष के भीतर 1581 सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों को निपटाने की योजना है। योजना यह है कि एक विशेष अदालत सालभर में 165 मुकदमों का निपटारा कर सकें।

228 सांसदों के मामले लंबित
वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, 184 लोकसभा सांसदों और 44 राज्यसभा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।
 यूपी के 143 विधायक घेरे में
उत्तर प्रदेश के 143, उत्तराखंड के 22, पंजाब के 16, दिल्ली के 23, हिमाचल प्रदेश के 11 और जम्मू एवं कश्मीर के 5 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। सबसे अधिक आपराधिक मामले महाराष्ट्र के 160 विधायकों के खिलाफ लंबित हैं।
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