44 दिनों की गर्मियों की छुट्टी के बाद सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम समाज में बहुविवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक करार देने की गुहार संबंधी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने पर विचार करेगा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सोमवार को वरिष्ठ वकील वी शेखर ने कहा कि बहुविवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं पर पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष जल्द सुनवाई की जाए और मामले का निपटारा किया जाए। इस पर पीठ ने कहा कि वह इस पर विचार करेगी। पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविल्कर और डीवाई चंद्रचूड़ होंगे।
वहीं दिल्ली की रहने वाली एक याचिकाकर्ता समीना बेगम की ओर से पेश वकील अश्विनी उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया कि उस पर याचिका को वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं और याचिकाकर्ता की जिंदगी खतरे में है। पीठ ने इस याचिका पर केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता याचिका के पक्ष में जवाब दाखिल करेंगे।
वकील उपाध्याय ने कहा, याचिकाकर्ता तो बलात्कार और मारे जाने की धमकियां दी जा रही हैं। हमने इसका उल्लेख सुप्रीम कोर्ट के सामने किया। उनका कहना है कि वह जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेंगे। एएसजी तुषार मेहता केंद्र सरकार की तरफ से पेश होंगे और उन्होंने कहा है कि वह जल्द ही लिखित बयान फाइल करेंगे।
मालूम हो कि निकाह-हलाला वह प्रथा है कि जिसके तहत तलाकशुदा महिला को अपने पति केसाथ पुन:वापस जाने के लिए पहले किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी होती है और उसे तलाक देने के बाद उसे अपने पूर्व पति से निकाह करना पड़ता है। जबकि बहुविवाह मुस्लिम पुरुष को चार पत्नी रखने की इजाजत देता है।