सुप्रीम कोर्ट अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए आवंटित 18,000 करोड़ रुपये के कोष में हेराफेरी का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने के लिए हो गई है।
प्रधान न्यायाधीश
दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर की पीठ ने वकील एम एल शर्मा की दलीलों पर विचार किया जिन्होंने जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।
शर्मा ने अपनी याचिका में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट का जिक्र किया और कहा कि एससी/एसटी समुदाय के लिए छात्रवृत्ति के लिए आवंटित 18 हजार करोड़ रुपये की निधि से सरकारी सेवकों तथा अन्य पदाधिकारियों ने हेराफेरी की बात की थी।
याचिका में कहा गया है कि
कैग ने 2013-17 के लिए ऑडिट किया और उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा तमिलनाडु राज्यों के खातों में अनियमितताएं पाई गईं।