हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाले छह लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि सभी को झूठा फंसाया गया था और वे 16 वर्ष तक सलाखों के पीछे रहे। लिहाजा कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सभी को पांच-पांच लाख रुपयेे का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की तफ्तीश पर कड़ी नाराजगी जताते हुए दोषपूर्ण जांच में शामिल रहे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
निचली अदालत ने अंकुश शिंदे, राजप्पा शिंदे, राजू शिंदे सहित छह लोगों को लूटपाट के दौरान सामूहिक दुष्कर्म और परिवार के पांच सदस्यों की हत्या का दोषी ठहराया था। इनमें से अंकुश, राजप्पा और राजू को फांसी की सजा दी गई थी। तीनों की सजा को बांबे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 में अपील का निपटारा करते हुए कहा था कि अपराध को बहुत ही नृशंस है।
तीन नहीं बल्कि सभी छह आरोपियों को फांसी की सजा होनी चाहिए। हालांकि बाद में जांच में पाया गया कि वारदात के वक्त अंकुश की उम्र 18 वर्ष से कम है। बाकी पांच ने फैसले पर पुनर्विचार करने की गुहार लगाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी को आरोपों से मुक्त कर दिया।