सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में 23 वर्षों से जेल में बंद जमायत-उल-मुजाहिद्दीन (जेएम) के पूर्व कमांडर आशिक हुसैन फकतू की दोष सिद्धि और उम्रकैद की सजा को रद्द करने से इनकार कर दिया है। फकतू मानवाधिकार आयोग कार्यकर्ता हृदयनाथ वांचू की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा तय करने के बाद फकतू की रिट (संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत) याचिका पर विचार नहीं जा सकता। फकतू की पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने इस बात को चुनौती दी थी कि क्या टाडा के तहत दर्ज इकबालिया बयान के आधार पर किसी को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दी जा सकती है? साथ ही उनका कहना था कि रिट याचिका के जरिये गलत फैसले को चुनौती दी जा सकती है।
उनका कहना था कि रिट याचिका पर इसलिए विचार किया जाना चाहिए क्योंकि फकतू को दोषी ठहराये जाने का निर्णय न्याय को निष्फल बनाना था। लेकिन तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि फकतू सिर्फ उस स्थिति में यह मांग कर सकता है जब बिना नोटिस जारी कर अदालत ने आदेश पारित किया हो या तब जब फैसले से लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा कम होने की आशंका हो। पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि फैसला सही नहीं है, इस आधार पर रिट याचिकाकर्ता मामले को दोबारा खुलवाने की बात नहीं कर सकता।