अदालती मामलों में वादियों की जाति या धर्म का उल्लेख बंद कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट सख्त है। हाल ही में शीर्ष अदालत की न्यायमूर्ति हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने इस संबंध में निर्देश दिया था। अदालत ने साफ किया था कि जाति या धर्म बताने की प्रथा बंद होनी चाहिए। अब एक बार फिर शीर्ष अदालत ने एक सर्कुलर जारी कर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को इस बाबत अपने 10 जनवरी के आदेश का पालन करने का आदेश दिया है।
इस सर्कुलर में कहा गया है कि रजिस्ट्री के सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर किसी भी याचिका या कार्यवाही के पक्षों में अब से जाति या धर्म का उल्लेख नहीं किया जाएगा। भले ही निचली अदालतों के समक्ष ऐसा कोई विवरण प्रस्तुत किया गया हो। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) जैसे बार निकायों के सदस्यों से भी निर्देशों का ध्यान रखने को कहा है।