उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह ताजमहल पर मालिकाना हक के लिए दावा नहीं करेगा।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि एक बार बोर्ड ने स्मारक पर अपने अधिकार का दावा कर दिया है, तो अदालत को इस मुद्दे का फैसला करना होगा।
पीठ ने कहा, "एक बार जब आपने स्मारक को वक्फ की संपत्ति के रूप में पंजीकृत कर दिया है, तो आपका बयान कि आप दावा नहीं करेंगे इससे कोई फायदा नहीं होगा।" अदालत मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को करेगी।
इससे पहले 11 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने अपने दावे को साबित करने के लिए वक्फ बोर्ड से मुगल शासक शाहजहां के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज पेश करने को कहा था। वक्फ बोर्ड की ओर से कहा गया कि शाहजहां ने खुद ताजमहल का वक्फनामा उनके पक्ष में तैयार करवाया था।
गौरतलब है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ताजमहल को अपनी संपत्ति के रूप में पंजीकृत करने का आदेश जारी किया था। वक्फ बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।