बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में पहली बार आयोजित हो रहे सनबर्न म्यूजिक फेस्टिवल में शराब परोसने की अनुमति को लेकर महाराष्ट्र सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। अदालत ने सरकार को उसकी शराब नीति पर दोबारा सोचने की सलाह दी है। मुख्य न्यायाधीश शिरी चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड़ की पीठ इस मामले में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका मुंबई निवासी चिंतामणि सारंग ने दायर की है, जिसमें फेस्टिवल के दौरान शराब बिक्री और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई है।
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मुंबई के सेवड़ी आयोजित की जा रही है सनबर्न फेस्टिवल
सनबर्न फेस्टिवल 19 से 21 दिसंबर तक मुंबई के सेवड़ी इलाके में, अटल सेतु के नीचे मौजूद इन्फिनिटी बे में आयोजित किया जा रहा है। यह एक ओपन-एयर कार्यक्रम है, जिसमें रोजाना दोपहर तीन बजे से रात 10 बजे तक करीब आठ घंटे संगीत कार्यक्रम होंगे। इसमें 16 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को प्रवेश की अनुमति है। इस सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को भरोसा दिलाया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस हालात संभालने में सक्षम होगी।
'हमें इलाज से पहले सावधानी बरतनी चाहिए'
हालांकि, अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखी। पीठ ने टिप्पणी की कि अगर हजारों लोग शराब पीकर मौजूद होंगे, तो केवल 200 पुलिसकर्मियों के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो सकता है। अदालत ने कहा, 'हमें इलाज से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। शराब पीकर खुले में घूमना आम लोगों के लिए मना है, तो इनके लिए कानून अलग क्यों हो?' हाईकोर्ट ने फिलहाल फेस्टिवल पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं दिया, लेकिन जनहित याचिका को लंबित रखते हुए कहा कि वह इस मामले में आगे विस्तार से सुनवाई करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि यह सही मौका है जब शराब लाइसेंस देने की नीति पर स्पष्ट कानून बनाया जाए।
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कार्यक्रम के आयोजकों ने क्या दी सफाई?
वहीं, फेस्टिवल आयोजकों की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि कार्यक्रम तय समय पर शुरू हो चुका है और उनके पास सभी जरूरी अनुमतियां हैं। आयोजकों के अनुसार, सुरक्षा के लिए 250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे, 500 से अधिक सुरक्षा कर्मी, पुलिस और मेडिकल सुविधाएं मौके पर मौजूद हैं। अब तक करीब 31 हजार टिकट बिक चुके हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने एक समय आयोजकों से 100 करोड़ रुपये जमा कराने की बात कही, लेकिन इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया। अब यह मामला आगे की सुनवाई के लिए सुरक्षित रखा गया है और सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि हाईकोर्ट इस मुद्दे पर क्या दिशा-निर्देश देता है।