अगले हफ्ते से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सांसदों को एक भावुक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि ऐसे में जब सांसद दूसरे दलों के पहले के आचरण जिक्र करते हुए कार्यवाही में बाधा डालने को सही ठहराएंगे, तब संसद में ‘व्यवधान का चक्र’ खत्म नहीं होगा। ‘सांसदों को उनकी नैतिक जिम्मेदारी’ की याद दिलाते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उनसे सदन में सुचारु कामकाज सुनिश्चित किए जाने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा है कि वक्त आ गया है कि हम आत्म चिंतन करें और इस बारे में फैसला करें कि हमारी संसद और लोकतंत्र की छवि के लिए आगे बढ़ने का रास्ता क्या है। बता दें कि संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होकर 10 अगस्त तक चलेगा। दो पन्नों के में कहा गया है कि लोकतंत्र के पवित्र मंदिर, ‘संसद’ की गरिमा और पवित्रता को बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
पिछले सत्र के दौरान सदन में सदस्यों के शोर शराबे, तख्तियां दिखाए जाने का जिक्र करते हुए महाजन ने कहा है कि अलग अलग विचार और असहमति संसदीय मर्यादा के अनुरूप होनी चाहिए ताकि लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास कायम रहे।
भावगत गीता के श्लोक उदाहरण दिया
लोकसभा अध्यक्ष ने श्रीमद भावगत गीता के श्लोक का भी जिक्र किया कि कैसे एक नेक व्यक्ति जो कुछ करता है, दूसरे उसका अनुसरण करते हैं। उन्होंने कहा है कि सांसदों को यह ध्यान रखना चाहिए कि संसद में उनके आचरण और चर्चा की गुणवत्ता का लोकतंत्र के संबंध में युवाओं के विचारों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।