भाजपा की वरिष्ठम नेताओं में शुमार महाजन ने हालांकि कहा, "अगर उम्र को लेकर भाजपा संगठन में वाकई कोई नीति तय की गयी है, तो सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को इसका पालन करना ही है।" महाजन ने एक सवाल पर कहा, "अभी मेरी इतनी उम्र भी नहीं हुई है कि मुझे राजनीति से संन्यास लेना पड़े। मैं भाजपा के लिये आज भी काम कर रही हूं और आगे भी करती रहूंगी।"
उन्होंने विपक्षी दलों के "महागठबंधन" पर निशाना साधते हुए कहा, "केंद्र में सरकार बनाने के लिये किसी भी सियासी खेमे के पास कम से कम 272 लोकसभा सीटें होनी चाहिये। लेकिन तथाकथित महागठबंधन में शामिल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इतनी सीटों पर मिलकर चुनाव तक नहीं लड़ रहे हैं। इस गठजोड़ के दल अलग-अलग राज्यों में बंटे हैं और प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के संबंध में किसी एक विपक्षी नेता के नाम पर सहमत भी नहीं हैं।"
महाजन ने कटाक्ष किया, "मुझे तो लगता है कि चुनावी महागठबंधन में शामिल विपक्षी दलों का मकसद सरकार बनाना है ही नहीं। इनका असल लक्ष्य है कि इस बार उनका कोई नेता कम से कम लोकसभा में विपक्ष के नेता की कुर्सी किसी तरह हासिल कर ले।"
वरिष्ठ भाजपा नेता ने न्यूनतम आय योजना (न्याय) के तहत गरीब परिवारों को हर महीने 6,000 रुपये देने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी चुनावी घोषणा पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा, "गरीबी हटाओ का नारा देने वाली कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों में गरीबों ने हमेशा ठोकरें ही खायी हैं और अन्याय झेला है। राहुल जरा हिसाब तो लगायें कि क्या कोई सरकार इतने धन का इंतजाम कर सकती है कि वह हर साल देश भर के गरीबों के खातों में 72,000-72,000 रुपये डाल सके?"
उन्होंने मराठी भाषा की एक कहावत का हवाला देते हुए कहा, "मनुष्य हर बात का स्वांग रच सकता है। लेकिन वह किसी को धन देने का स्वांग नहीं रच सकता। लिहाजा "न्याय" के चुनावी वादे को लेकर कोई भी गरीब कांग्रेस पर भरोसा नहीं करेगा।"