देश में ही निर्मित सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान रूस में बने एसयू-30 विमान से महंगा है। इसका कारण यह है कि दोनों की खूबियां अलग-अलग है। रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने बुधवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि अलग खूबियों के कारण दोनों की कीमतों में तुलना करना उचित नहीं है।
भामरे ने बताया कि स्वदेशी सुखोई में कई सारे बदलाव किए गए हैं ताकि वायुसेना की जरूरत अनुसार इसकी कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके। इस कारण इसकी लागत बढ़ गई है। इसकी कीमत में तकनीक हस्तांतरण कार्यक्रम के तहत रूस को दिया जाने वाला लाइसेंस शुल्क शामिल है। इसके अलावा रूसी एसयू-30 के उत्पादन की तुलना में स्वदेशी सुखोई का उत्पादन काफी कम है।
वहीं कच्चे माल और इसके कंपोनेंट्स के लिए रशियन ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर्स पर निर्भरता है। यह भी इसकी कीमत अधिक होने का कारण है। एक अन्य सवाल के जवाब में रक्षा राज्यमंत्री ने बताया कि वायुसेना में अभी 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन कार्यरत हैं। वहीं उड़ने के लिए तैयार 36 राफेल विमान बुलाए गए हैं।
एस-400 मिसाइल की डिलीवरी अक्तूबर 2020 से
रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि रूस से एस-400 रक्षा मिसाइलों की डिलीवरी अक्टूबर 2020 से शुरू होगी। दोनों देशों के बीच पिछले अक्तूबर में 40,000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद पर समझौता हुआ था। इसके तहत रूस वर्ष अप्रैल 2023 तक आपूर्ति पूरी करेगा।