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गन्ना राजनीति से घबराई सरकार, कृषि मंत्री के साथ प्रधानमंत्री से सीधे मिलेंगे गन्ना किसान

Fri, 29 Jun 2018 08:12 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
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गन्ना राजनीति से घबराई सरकार अब सीधे ही किसानों से रूबरू होने की योजना बना रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गन्ना किसानों से मुलाकात करने वाले हैं। 

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इस मुलाकात में प्रधानमंत्री न केवल गन्ना किसानों की समस्याओं को सुनेंगे बल्कि हाल ही में केन्द्र सरकार की कल्याणकारी कृषि योजनाओं के बारे में किसानों को अवगत कराएंगे। सरकार ने हाल ही में चीनी उद्योग को 8500 करोड़ का राहत पैसेज जारी किया था।  

सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार शाम साढ़े चार बजे 150 से 200 गन्ना किसान प्रधानमंत्री मोदी से उनके आवास लोक कल्याण मार्ग पर मिलेंगे। ये किसान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और कर्नाटक से आए हैं। 
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सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में केन्द्र सरकार गन्ना सेक्टर और गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर चर्चा करेगी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप भी करेगी। प्रधानमंत्री के साथ होने वाली इस मुलाकात में गन्ना किसानों के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह और राज्य सभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर भी शामिल होंगे। 

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सीधे प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे

प्रधानमंत्री इससे पहले नमो एप के जरिए देशभर के किसानों को संबोधित कर चुके हैं, लेकिन ऐसा पहली बार होगी जब किसान सीधे प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे। 

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री से बातचीत करने के लिए केवल उन गन्ना किसानों को बुलाया गया है जो केवल किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं रखते और किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते हैं। सूत्रों के मुताबिक इन किसानों में कुछ ऐसे भी किसान हैं, जो भारतीय किसान संघ से जु़ड़े हैं। किसान प्रधानमंत्री के सामने क्षेत्र के गन्ना किसानों की समस्याओं को रखेंगे ही, साथ चीनी मिलों की बंदी से किसानों को हो रही दिक्कत, गन्ना मूल्य भुगतान, गन्ने की कीमत जैसे मुद्दे शामिल होंगे। गौरतलब है कि चीनी उद्योग से 5 करोड़ किसान परिवार जुड़े हुए हैं और 5 लाख वर्कर चीनी मिलों में कार्यरत हैं। 

2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए मोदी सरकार किसानों को अपने पाले में करना चाहती है। वहीं कैराना उपचुनाव में हार के बाद भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन जाती दिखाई पड़ रही है। जिससे घबराई मोदी कैबिनेट ने गन्ना किसानों को राहत देने के लिए 8,500 करोड़ के पैकेज का ऐलान किया था। इसके तहत गन्ना मिलों को एथनाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 4,500 करोड़ रुपये के सस्ते कर्ज की सुविधा और चीनी का 30 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने की योजना भी है, जिस पर 1,200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

वहीं सरकारों से लेकर मिल प्रबंधन तक कह रहे हैं कि गन्ने का जरूरत से अधिक उत्पादन हुआ है, जिससे चालू सत्र में देश में चीनी का उत्पादन 32.1 मिलियन टन को पार कर गया है, जो पिछले साल की अपेक्षा काफी अधिक है। यही वजह है कि पिछले छह और सात महीने में चीनी के दामों में करीब दस रुपये किलो तक की गिरावट आई है। 

जहां तक गन्ने के उत्पादन की बात है, तो 2015 और 16 के सत्र में मिलों ने 645.66 लाख टन गन्ने की पेराई की थी। 2016-17 के सत्र में 827.16 लाख टन की पेराई की तो इस बार 1,100 लाख टन से अधिक की पेराई हुई है। 
 
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