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Sugar Production: गन्ने की अधिक आपूर्ति से चीनी उत्पादन 22 फीसदी बढ़ा, 15 जनवरी तक चालू थीं 518 मिलें

Wed, 21 Jan 2026 05:02 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

गन्ने की अधिक आपूर्ति और बेहतर पैदावार से चीनी उत्पादन में तेज उछाल आया है और चालू सत्र में 15 जनवरी तक उत्पादन 22 फीसदी बढ़ चुका है। हालांकि उत्पादन बढ़ने के बावजूद चीनी के दाम गिर रहे हैं, जिससे मिलों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है और किसानों के भुगतान में देरी के संकेत मिल रहे हैं। रिकॉर्ड उत्पादन के बीच क्या सरकार एमएसपी बढ़ाकर मिलों और किसानों दोनों को राहत दे पाएगी? पढ़िए रिपोर्ट-
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चीनी उत्पादन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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गन्ने की अधिक आपूर्ति और बेहतर पैदावार के चलते देश का चीनी उत्पादन 2025-26 सत्र में 15 जनवरी तक सालाना आधार पर 22 फीसदी बढ़कर 1.59 करोड़ टन पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में देशभर में 1.3 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
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उद्योग संगठन भारतीय चीनी एवं बायो-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) ने मंगलवार को बताया, इस साल 15 जनवरी तक लगभग 518 चीनी मिलें चालू थीं, जबकि एक साल पहले यह संख्या 500 थी। देश में चीनी का सत्र अक्तूबर से सितंबर तक चलता है। सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन सालाना आधार पर 42.7 लाख टन से 51 फीसदी बढ़कर 64.5 लाख टन पहुंच गया। उत्तर प्रदेश में उत्पादन 42.8 लाख टन से बढ़कर 46 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया। कर्नाटक का उत्पादन सालाना आधार पर बढ़कर 31 लाख टन पहुंच गया, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा 27.5 लाख टन रहा था।

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एमएसपी में संशोधन करने की मांग
संस्था ने कहा, चीनी का भंडार बढ़ रहा है और संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के भुगतान का बकाया बढ़ना शुरू हो गया है। अगर मौजूदा हालात बने रहे तो यह और बढ़ सकता है। इस्मा ने वित्तीय स्थिरता बहाल करने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में जल्द संशोधन की मांग की है।
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चीनी के घटे दाम, खराब हो रही मिलों की स्थिति
इस्मा ने कहा, गन्ने की बढ़ती कीमतों और चीनी के दाम में गिरावट से मिलों की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है। किसानों को गन्ने के भुगतान में देरी हो रही है। उद्योग निकाय ने बताया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमतें गिरकर लगभग 3,550 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं, जो उत्पादन लागत से काफी कम है।

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