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'रिजीम चेंज षड्यंत्र का प्रतीक': सुधांशु त्रिवेदी ने तिरंगा प्रदर्शन पर उठाए सवाल, कहा- इनको जनसर्मथन नहीं

Fri, 16 Oct 2026 09:12 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस, इंडिया गठबंधन और वामपंथी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से सरकार बदलना लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जबकि साजिश और हिंसा से सत्ता गिराने की कोशिश अलग है। उन्होंने कनॉट प्लेस के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई। आखिर त्रिवेदी ने ‘रिजीम चेंज’ का मुद्दा क्यों उठाया? क्या प्रदर्शन और परीक्षा सुधार आंदोलन को लेकर उनके आरोपों ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा किया है?

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सुधांशु त्रिवेदी, भाजपा सांसद - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस, इंडिया गठबंधन और वामपंथी दलों पर निशाना साधते हुए ‘रिजीम चेंज’ और ‘सरकार बदलने’ के बीच अंतर समझाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता का समर्थन घटने और राजनीतिक सफलता की संभावना कम होने के कारण विपक्ष की ओर से अब ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के जरिए सरकार बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है, जबकि साजिश और हिंसक संघर्ष के जरिए सरकार गिराने की कोशिश को रिजीम चेंज कहा जाता है।
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सुधांशु त्रिवेदी ने 'रिजीम चेंज' को लेकर क्या कहा?
भाजपा सांसद ने कहा कि कांग्रेस, इंडिया गठबंधन और कमजोर होते वामपंथी दलों के सामने राजनीतिक सफलता की संभावनाएं कम होती जा रही हैं। उनके मुताबिक, इन दलों के जनसमर्थन में लगातार कमी आ रही है और उनकी नैतिक स्थिति में भी गिरावट आई है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि इसी वजह से भारतीय राजनीति में ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्द सुनाई देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस तरह की कोशिशों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि दोनों के अर्थ अलग हैं।

सरकार बदलने और रिजीम चेंज में क्या अंतर बताया?
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि चुनाव के जरिए जनता के फैसले से सरकार बदलना लोकतंत्र का हिस्सा है। इसके विपरीत, उन्होंने ‘रिजीम चेंज’ का अर्थ साजिश, हिंसक संघर्ष या विदेशी ताकतों के साथ मिलकर सरकार को गिराने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों बातों को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि लोकतांत्रिक चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन और कथित साजिश के जरिए सरकार गिराने के प्रयास के बीच स्पष्ट अंतर समझना जरूरी है।
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कनॉट प्लेस में प्रदर्शन को लेकर क्या बोले भाजपा सांसद?
त्रिवेदी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां बहुत कम लोग जुटे थे। उन्होंने कनॉट प्लेस के बाहरी हिस्से को इंदिरा चौक और अंदरूनी हिस्से को राजीव चौक बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मौजूदा हालात देखकर दोनों नेताओं को शर्मिंदगी महसूस होती। यह टिप्पणी प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर थी। हालांकि, उनके बयान में प्रदर्शनकारियों की सटीक संख्या नहीं बताई गई।

क्या प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की साजिश का आरोप लगाया?
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि त्योहारों के मौसम में मध्य दिल्ली सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों के लोगों के लिए भी कारोबार का बड़ा केंद्र है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी इलाके में प्रदर्शन करके भारत की अर्थव्यवस्था को बाधित करने की कोई साजिश की जा रही है। यह उनका आरोप और आशंका थी। उन्होंने युवाओं से भी इस मुद्दे को समझने की अपील की।

परीक्षा सुधार के आंदोलन पर क्या आरोप लगाया?
भाजपा सांसद ने कहा कि तीन से चार महीने पहले जिस आंदोलन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली और प्रवेश परीक्षाओं में सुधार बताया जा रहा था, वह अब कथित तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में लगा है। उन्होंने युवाओं से इस बदलाव को समझने की अपील की। हालांकि, दिए गए बयान में उन्होंने इस आरोप के समर्थन में कोई अलग प्रमाण या विस्तृत जानकारी नहीं दी। उनका पूरा बयान विपक्ष की राजनीति, ‘रिजीम चेंज’ की अवधारणा और दिल्ली में प्रदर्शन के आर्थिक असर को लेकर था।
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