NDMA Emergency Alert: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण 2 मई 2026 को देशभर में सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का एक बड़ा परीक्षण कर रहा है। इसके तहत नागरिकों के मोबाइल फोन पर अचानक तेज आवाज और वाइब्रेशन के साथ एक इमरजेंसी मैसेज भेजा जा रहा है। सरकार ने अपील की है कि लोग इस मैसेज को देखकर बिल्कुल न घबराएं, क्योंकि यह केवल एक मॉक ड्रिल है। आइए, विस्तार से इसे समझते हैं।
देश की इमरजेंसी कम्युनिकेशन (आपातकालीन संचार) व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एनडीएमए (NDMA) ने यह कदम उठाया है। शनिवार, 2 मई 2026 को पूरे देश में सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का यह परीक्षण किया जा रहा है। इसके तहत नागरिकों के मोबाइल फोन पर एक आपातकालीन अलर्ट (नोटिफिकेशन) भेजा जा सकता है। इस ड्रिल के दौरान, फोन पर आने वाले मैसेज के साथ बहुत तेज आवाज और झटके (वाइब्रेशन) भी महसूस हो सकते हैं। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि यह कोई असली आपातकाल नहीं है, बल्कि केवल एक सुरक्षा जांच है।
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मोबाइल पर यह सायरन बजने पर नागरिकों को क्या करना चाहिए?
प्राधिकरण ने साफ तौर पर कहा है कि फोन पर ऐसे अलर्ट मिलने पर लोगों को बिल्कुल नहीं घबराना चाहिए। इस मैसेज को देखने के बाद आपको अपनी तरफ से कोई भी जवाब देने या कोई काम करने की जरूरत नहीं है। संचार मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 2 मई 2026 को इस मोबाइल आधारित सिस्टम की शुरुआत कर रहे हैं। इस अहम सिस्टम को संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने मिलकर तैयार किया है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि संकट के समय जरूरी जानकारी हर नागरिक तक तुरंत पहुंच सके।
आंध्र प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में इस ड्रिल का समय क्या है?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए आंध्र प्रदेश के एनडीएमए (NDMA) ने इस ड्रिल के समय की घोषणा की है। उन्होंने लिखा है कि एनडीएमए (NDMA) देशव्यापी आपातकालीन चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। इसी के तहत, आंध्र प्रदेश की राजधानी के इलाकों में शनिवार सुबह परीक्षण संदेश भेजे जाएंगे। फोन पर यह टेस्टिंग वाले मैसेज सुबह 11:15 बजे से लेकर दोपहर 12:15 बजे के बीच भेजे जाएंगे।
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देश के किन-किन राज्यों और शहरों में यह अलर्ट भेजा जा रहा है?
यह मोबाइल अलर्ट टेस्ट देश की राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों (NCR) में किया जाना है।
इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों को भी इस परीक्षण में शामिल किया गया है।
हालांकि, एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के सीमावर्ती इलाकों (बॉर्डर एरिया) में यह टेस्ट नहीं किया जाएगा।
जिन राज्यों में अभी चुनाव चल रहे हैं, वहां भी मोबाइल पर इस तरह का कोई अलर्ट मैसेज नहीं भेजा जाएगा।
इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य क्या है और बंगाल में इसे क्यों नहीं किया जा रहा है?
पश्चिम बंगाल में यह टेस्ट नहीं हो रहा है क्योंकि वहां दक्षिण 24 परगना जिले के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान चल रहा है।
इस अलर्ट ड्रिल का मुख्य लक्ष्य उन स्थितियों में सूचना पहुंचाना है, जहां समय बहुत कम होता है। इसे सुनामी, भूकंप और आकाशीय बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय अलर्ट करने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा, गैस लीक या रसायनों के खतरे जैसी मानव निर्मित दुर्घटनाओं के समय भी यह सिस्टम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तुरंत अलर्ट करेगा।