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छह पड़ोसी देशों को भारत का बेशकीमती तोहफा, पीएम मोदी ने बताया ऐतिहासिक क्षण

Fri, 05 May 2017 08:42 PM IST
amarujala.com-Presented By: संदीप भ्ाट्ट
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अपने छह पड़ोसी देशों को बेशकीमती तोहफा देते हुए भारत ने शुक्रवार को दक्षिण एशियाई संचार उपग्रह जीसैट-9 को सफलतापूर्वक लांच कर दिया। यह उपग्रह इस क्षेत्र के देशों को संचार और आपदा के समय मदद देगा। पीएम मोदी ने इस बड़ी सफलता पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी है। 
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इसरो द्वारा तैयार नवीनतम संचार उपग्रह जीसैट-9 को एसएएस रोड पिग्गीबैक कहा जाता है। इसे 50 मीटर लंबे स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन वाले रॉकेट जीएसएलवी-एफ 09 से प्रक्षेपित किया गया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ09 का शाम चार बजकर 57 मिनट पर प्रक्षेपण हुआ और इसकी मदद से जीसैट-9 को कक्षा में स्थापित कर दिया गया। यह मिशन जीएसएलवी की 11वीं उड़ान है।

पीएम मोदी ने जीसेट-9 के सफल प्रक्षेपण पर सार्क देशों को बधाई दी। पीएम मोदी ने विडियो कांफ्रेस के जरिए सभी सार्क देशों के राष्ट्रध्यक्षों से बात की और सेटेलाइट GSAT-9 के सफल प्रक्षेपण और सबके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन भारत ही नहीं दुनिया के लिए भी एतिहासिक है। उन्होंने कहा कि  ‘दक्षिण एशियाई उपग्रह का सफल प्रक्षेपण ऐतिहासिक क्षण है। इससे मेलजोल के नए आयाम खुलेंगे। इससे दक्षिण एशिया और हमारे क्षेत्र को काफी लाभ मिलेगा।’ पीएम मोदी ने GSAT-9 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो के वैज्ञानिकों की टीम को भी बधाई दी।
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मोदी की अंतरिक्ष कूटनीति
सत्ता संभालने के तुरंत बाद 2014 में अंतरिक्ष कूटनीति की पहल करते हुए पीएम मोदी ने एक ऐसे सैटेलाइट को लांच करने की एकतरफा पेशकश की थी जिसके डाटा का इस्तेमाल सभी आठ सार्क देश कर सकें। पीएम के इस सपने को इसरो ने तीन साल से पहले ही हकीकत में बदल दिया। गत 30 अप्रैल को प्रसारित अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने ‘सबका साथ-सबका विकास’ का जिक्र करते हुए इस सैटेलाइट को भारत का अपने पड़ोसियों को अनमोल उपहार बताया था। 
  Successful launch of South Asian Satellite is a historic moment. It opens up new horizons of engagement: PM Narendra Modi pic.twitter.com/GpCDgN8HDF — ANI (@ANI_news) May 5, 2017

  I congratulate government of India. Hope this will open a new horizon of cooperation in the region: Bangladesh Prime Minister Sheikh Hasina pic.twitter.com/ALnlc0IM2Y — ANI (@ANI_news) May 5, 2017
  बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वे भारत सरकार को बधाई देती हैं। आशा है कि यह कदम आपसी समन्वय के नए रास्ते खोलेगा। Development must become citizen centric. Today's initiative is child centred& women centred, it makes governance accessible: President Ghani pic.twitter.com/N04eOPTcYD — ANI (@ANI_news) May 5, 2017 अफगानी राष्ट्रपति अशरफ घनी ने कहा, यदि जमीन पर सहयोग संभव न हो तो निश्चित तौर पर यह आकाश में संभव  हो सकता है। हमें विश्वास है कि हम संगठित होंगे। 

विकास को नागरिक केंद्रित होना चाहिए। भारत की यह पहल महिला और बाल केंद्रित है। इससे प्रशासन तक नागरिकों की पहुंच बढ़ेगी।   श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरीसेना ने कहा, सेटेलाइट की लॉन्चिंग पर बधाई। यह सार्क देशों के बीच सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों के निर्माण की दृष्टि का प्रतीक है। The launch of this satellite will boost regional cooperation & bring about common progress of our region: Bhutan PM Tshering Tobgay pic.twitter.com/TtsVsWGotf — ANI (@ANI_news) May 5, 2017 भूटान के प्रधानमंत्री थेसरिंग तोबगे ने कहा, सेटेलाइट के प्रक्षेपण से क्षेत्रीय सहयोग में तेजी आएगी, साथ ही सभी देशों का विकास होगा। 
Launching of #SouthAsiaSatellite signifies India's neighbourhood first policy: Abdulla Yameen, Maldives President pic.twitter.com/VOJbiZ8VVN — ANI (@ANI_news) May 5, 2017 मालदीव के राष्ट्रपति ने साउथ एशिया सेटेलाइट की लॉन्चिंग पर कहा यह भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' की नीति को दर्शाता है। 

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क्या है जीसैट-9

जीसैट-9 एक 2230 किलोग्राम की वहन क्षमता वाला भूस्थतिक संचार उपग्रह है। यह केयू-बैंड में दक्षिण एशियाई देशों को विभिन्न संचार सेवाएं मुहैया कराएगा। इसमें टेली-कम्युनिकेशन, टेलीविजन, डीटीएच, वीसैट, टेली शिक्षा एवं टेली मेडिसिन शामिल है।

इसमें भागीदार देशों के बीच हॉटलाइन उपलब्ध करवाने की भी क्षमता है। यह भूकंप, चक्रवात, बाढ़ और सुनामी जैसी आपदा की स्थिति में बेहतर प्रबंधन उपलब्ध कराने में मददगार होगा। यह उपग्रह 12 वर्ष तक अपनी सेवाएं देगा।

235 करोड़ का उपग्रह
इस उपग्रह की कीमत करीब 235 करोड़ रुपये है। इसका पूरा खर्च भारत ने ही उठाया है। सार्क के आठ सदस्य देशों में से सात यानी भारत, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और मालदीव इस परियोजना का हिस्सा हैं। पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट में शामिल नहीं था। वह यह कहते हुए परियोजना से अलग हो गया कि उसका अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम है।
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